RoadGrid को EV चार्जर प्लांट के लिए ₹13 करोड़ की सौगात, बनेगी 'मेक इन इंडिया' की मिसाल

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AuthorMehul Desai|Published at:
RoadGrid को EV चार्जर प्लांट के लिए ₹13 करोड़ की सौगात, बनेगी 'मेक इन इंडिया' की मिसाल

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी लाने के लिए RoadGrid को एक बड़ी कामयाबी मिली है। कंपनी को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) से ₹13 करोड़ की फंडिंग मिली है, जिससे वह ₹27.5 करोड़ की लागत से अपना एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। इस प्लांट में कंपनी अपने पेटेंटेड EV चार्जर्स बनाएगी।

'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा

यह नई फैसिलिटी खास तौर पर RoadGrid के पेटेंटेड यूनिवर्सल EV चार्जर बनाने के लिए स्थापित की जाएगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹27.5 करोड़ है, जिसमें से ₹13 करोड़ का इंतजाम TDB ने किया है। बाकी का खर्च कंपनी अपने इंटरनल रिसोर्सेज और पहले के निवेश से उठाएगी।

नई यूनिट में हर साल 2,000 EV चार्जिंग यूनिट्स तैयार करने का लक्ष्य है। RoadGrid का मकसद एंड-टू-एंड प्रोडक्शन को लोकल बनाना है, जिससे कंपनी पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम जैसे अहम हिस्से भी भारत में ही डेवलप कर सके। यह प्रोजेक्ट मार्च 2027 तक चालू होने की उम्मीद है और इससे 100 से ज्यादा नई नौकरियां भी पैदा होंगी।

EV इंफ्रास्ट्रक्चर में अहम कदम

RoadGrid की टेक्नोलॉजी 140 kW डुअल DC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। यह CCS2 और टाइप 6 जैसे मल्टीपल कनेक्टर को सपोर्ट करती है, जिससे फ्लीट ऑपरेटर्स और आम ग्राहकों के लिए चार्जिंग की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। भारत में ऐसे सिस्टम का मैन्युफैक्चरिंग करना, विदेशी इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करेगा, जो करेंसी के उतार-चढ़ाव और ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों से प्रभावित हो सकता है।

2020 में स्थापित RoadGrid ने पहले ही 100 से ज्यादा चार्जर इंस्टॉल किए हैं और 200 पॉइंट मैनेजमेंट के तहत हैं। HPCL और IOCL जैसी बड़ी सरकारी एनर्जी कंपनियों के साथ मौजूदा पार्टनरशिप भविष्य की डिमांड के लिए मजबूत आधार तैयार करती है। कंपनी ने इससे पहले ₹12 करोड़ की प्री-सीरीज A फंडिंग जुटाई थी, जिससे उसे इंदौर, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में शुरुआती डिप्लॉयमेंट में मदद मिली थी।

भविष्य की चुनौतियां और मौके

इस विस्तार की फाइनेंशियल सफलता कंपनी की कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन को पूरा करने और 2027 तक प्रोडक्शन टारगेट हासिल करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी नई फैसिलिटी की लागत का प्रबंधन करते हुए अपने ऑपरेशंस को कितनी प्रभावी ढंग से बढ़ा पाती है। EV चार्जिंग सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए, कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग और हाई प्रोडक्ट रिलायबिलिटी बनाए रखना कंपनी के लिए अहम होगा।

अगले कदम में कंस्ट्रक्शन फेज और प्लांट का कमीशनिंग शामिल है। स्टेकहोल्डर्स इलेक्ट्रिक गाड़ियों के एडॉप्शन रेट के साथ-साथ फास्ट-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को देखते हुए, कंपनी के ऑर्डर बुक ग्रोथ पर नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.