सूरत स्थित Rayzon Solar अपने नए 5.1 GW TOPCon सेल प्लांट की शुरुआत दिसंबर 2026 में करने जा रही है। कंपनी ने अपने IPO प्लान के बजाय Union Bank of India से **₹1,350 करोड़** का कर्ज लेकर इस विस्तार को फंड करने का फैसला किया है।
Rayzon Solar सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि दिसंबर 2026 तक उसका 5.1 GW क्षमता वाला TOPCon सोलर सेल प्लांट चालू हो जाएगा। फिलहाल 11.3 GW की सोलर मॉड्यूल क्षमता के साथ काम कर रही यह कंपनी अब मॉड्यूल असेंबली से आगे बढ़कर वर्टिकल इंटीग्रेशन की ओर कदम बढ़ा रही है। उम्मीद है कि नई यूनिट से पहली शिपमेंट 2027 की पहली तिमाही में शुरू हो जाएगी।
फाइनेंसिंग की बदली रणनीति
बाजार की अस्थिरता को देखते हुए कंपनी ने अपनी फंड जुटाने की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। Rayzon Solar ने अपने IPO पर निर्भरता कम करते हुए कर्ज का रास्ता चुना है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए Union Bank of India से ₹1,350 करोड़ का टर्म लोन लिया है, ताकि मार्केट कंडीशन कैसी भी रहे, प्रोजेक्ट की गति धीमी न हो।
इसके अलावा, कंपनी 2028 तक 5.1 GW का इनगट कास्टिंग (ingot casting) और वेफर स्लाइसिंग (wafer slicing) यूनिट शुरू करने की योजना बना रही है, जो उसे सप्लाई चेन में और अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा।
निवेशकों के लिए रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह विस्तार कंपनी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, लेकिन निवेशकों को कुछ जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए। पहला बड़ा रिस्क 'एग्जीक्यूशन रिस्क' है, यानी तय समय सीमा के भीतर बिना बजट बढ़े प्लांट को चालू करना। साथ ही, कर्ज लेने से कंपनी पर ब्याज का बोझ बढ़ेगा, जो भविष्य के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। भारतीय सोलर सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्लोबल प्राइस में उतार-चढ़ाव भी कंपनी की लाभप्रदता के लिए एक बड़ी चुनौती बने रहेंगे।
