नई सब्सिडियरी का गठन
रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (REC) ने अपनी एक आर्म, REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (RECPDCL) के जरिए, Vizag Power Transmission Ltd को अपनी 100% मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी के तौर पर रजिस्टर किया है। 16 फरवरी 2026 को रजिस्टर हुई इस नई कंपनी का ऑथराइज्ड और पेड-अप कैपिटल ₹5 लाख है। इस सब्सिडियरी का मुख्य काम आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम क्षेत्र में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करना है। इस खबर के ऐलान वाले दिन, सोमवार को REC Ltd के शेयर 1.90% चढ़कर ₹353.50 पर बंद हुए, जो कि बाजार की पॉजिटिव प्रतिक्रिया दर्शाता है।
PFC कंसॉलिडेशन का फायदा
यह कदम ऐसे समय में आया है जब REC Ltd फरवरी 2026 की शुरुआत में ही सरकारी कंपनी पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) के साथ कंसॉलिडेट हुई है। इस मर्जर के बाद बनी यह एक विशाल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन है, जिसका कंबाइंड लोन बुक ₹17 लाख करोड़ से भी ज्यादा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस कंसॉलिडेशन से REC की बड़े रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स के लिए फाइनेंसिंग की सुविधा काफी बढ़ जाएगी। यह मर्जर पहले की सिंगल-लेंडर (एक ही बैंक से कर्ज) की लिमिटेशन से निकलने और बेहतर दरों पर डेट रिफाइनेंसिंग में मदद करेगा, जिससे Vizag Power Transmission को सीधे तौर पर फायदा होगा। पावर-फोकस्ड NBFC स्पेस में इस मर्जर से Competition कुछ कम होने की बात कही जा रही है, लेकिन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए दोनों कंपनियों का स्केल बहुत जरूरी है।
भारत का ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य और इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका
भारत का नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन देश को 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन में एक ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखता है, जिसके लिए सालाना 5 मिलियन टन प्रोडक्शन का टारगेट है। इस मिशन के लिए ₹8 लाख करोड़ के भारी निवेश की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करना एक महत्वपूर्ण कदम है। RECPDCL, जिसके पास पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स को कोऑर्डिनेट करने का अनुभव है, इस काम को कुशलता से मैनेज कर सकती है। हालांकि, यह ध्यान रखना होगा कि ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर अभी शुरुआती दौर में है और ऐसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण में एग्जीक्यूशन और रेगुलेटरी रिस्क (जैसे लैंड एक्विजिशन, देरी) शामिल हो सकते हैं।
भविष्य की राह
एनालिस्ट्स REC Ltd के लिए ₹510 का एवरेज शेयर प्राइस टारगेट दे रहे हैं, जो मौजूदा ₹353.50 के लेवल से 44% से भी ज्यादा की संभावित तेजी का संकेत देता है। REC का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए उसका लोन बुक 11-12% की दर से बढ़ेगा। कुल मिलाकर, PFC-REC की एकजुट एंटिटी भारत की एनर्जी ट्रांजिशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है, और देश के रिन्यूएबल एनर्जी और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के लिए जरूरी बड़े प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने की क्षमता रखती है।
