सरकार ने PM-KUSUM स्कीम की डेडलाइन को **31 मार्च 2027** तक आगे बढ़ा दिया है। देश भर में अब तक **10 लाख** से अधिक सोलर पंप लगाए जा चुके हैं, और अब निवेशकों की नजर इसके अगले फेस यानी 'PM-KUSUM 2.0' पर है।
सरकारी आदेश के मुताबिक, PM-KUSUM के पहले चरण की डेडलाइन को अब 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला उन कॉन्ट्रैक्टर्स और डेवलपर्स के लिए बड़ी राहत है, जो सोलर-पावर्ड एग्रीकल्चर इरिगेशन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।
अब तक की प्रगति
अगस्त 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में 10 लाख से ज्यादा स्टैंडअलोन सोलर पंप और 13 लाख से अधिक ग्रिड-कनेक्टेड पंप लगाए जा चुके हैं। इस पूरी स्कीम के लिए केंद्र सरकार ने ₹34,422 करोड़ का फंड एलोकेट किया है, जिसका मकसद कृषि क्षेत्र में डीजल पर निर्भरता को कम करना और डिस्कॉम (DISCOMs) पर पड़ रहे वित्तीय बोझ को हल्का करना है।
PM-KUSUM 2.0 की तैयारी
अब बाजार की नजर इसके दूसरे फेज यानी 'PM-KUSUM 2.0' पर है, जिसमें एग्रीवोल्टेइक (agrivoltaics) तकनीक पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए करीब ₹50,000 करोड़ के बजट का अनुमान है। Shakti Pumps और GK Energy जैसी कंपनियों के पास ऑर्डर बुक तो मजबूत है, लेकिन असल चुनौती इन ऑर्डर्स को तेजी से रेवेन्यू में बदलने की है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks for Investors)
ग्रोथ के साथ-साथ इस सेक्टर में कुछ चुनौतियां भी हैं:
- वर्किंग कैपिटल का दबाव: स्टेट डिस्कॉम्स से पेमेंट मिलने में देरी कंपनियों के कैश फ्लो पर बुरा असर डाल सकती है।
- मेंटेनेंस की चुनौती: केवल पंप लगाना ही काफी नहीं है; सुदूर इलाकों में सर्विस और मेंटेनेंस नेटवर्क बनाने वाली कंपनियां ही लॉन्ग-टर्म में आगे रहेंगी।
- ग्रिड इंटीग्रेशन: 'डक कर्व' (duck curve) जैसी तकनीकी समस्याएं भी ग्रिड मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
