₹3,135 करोड़ की ग्रीन अमोनिया डील और गिरते शेयर
Oriana Power ने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के साथ ₹3,135 करोड़ की एक बड़ी और लंबी अवधि की ग्रीन अमोनिया खरीद डील पक्की की है। इस एग्रीमेंट के तहत, कंपनी अगले 10 सालों तक सालाना 60,000 टन ग्रीन अमोनिया सप्लाई करेगी। इस सौदे में मध्य प्रदेश की कंपनी Madhya Bharat Agro Products Ltd अंतिम खरीदार (end-offtaker) होगी। यह डील Oriana Power को भारत के तेजी से बढ़ते ग्रीन फ्यूल सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका देगी। यह सब सरकार के 'स्ट्रैटेजिक इंटरवेंशन्स फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन' (SIGHT) प्रोग्राम के तहत हो रहा है, जो भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता बढ़ाने और फॉसिल फ्यूल आयात कम करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
हालाँकि, इस बड़ी डील के बावजूद, Oriana Power के शेयर का प्रदर्शन चिंताजनक बना हुआ है। चालू साल (Year-to-Date) में स्टॉक 23.03% गिर चुका है, और पिछले 6 महीनों में इसमें 41.61% की भारी गिरावट आई है। डील की घोषणा से ठीक पहले ₹1,732 के स्तर पर कारोबार कर रहे शेयर, डील के बाद ₹1,544.25 के आस-पास बंद हुए, जो निवेशकों के संदेह को दर्शाता है।
क्या है डील की खासियत और बाजार का डर?
Oriana Power ने ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति ₹52.25 प्रति किलोग्राम की दर से तय की है, जो हाल के SECI ऑक्शन में ₹49.75 से ₹64.74 प्रति किलोग्राम की रेंज में आती है। यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ₹110 प्रति किलोग्राम से काफी कम है, जो दिखाता है कि भारत इस क्षेत्र में लागत-प्रतिस्पर्धी (cost-competitive) बन रहा है। सरकार का SIGHT प्रोग्राम, जिसके लिए ₹17,490 करोड़ का बजट रखा गया है, ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना चाहता है। ACME Cleantech, Jakson Green और NTPC Renewable Energy जैसी कंपनियां भी ऐसे ही कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर रही हैं, जो ग्रीन अमोनिया क्षेत्र में ग्रोथ की ओर इशारा करता है।
लेकिन, इन आकर्षक लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के बावजूद, Oriana Power के मार्जिन पर सवाल उठ रहे हैं। ₹52.25 प्रति किलोग्राम की दर से मिलने वाले टैरिफ में रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मध्य प्रदेश में परिचालन की बढ़ती लागतों को कवर करना एक चुनौती हो सकती है। कंपनी का मार्केट कैप ₹3,519 करोड़ के आसपास है और इसका ट्रेलिंग P/E रेश्यो 15.2 है, जो 48.62% के मजबूत रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) से समर्थित है। वहीं, इसके खरीदार Madhya Bharat Agro Products Ltd का P/E रेश्यो 39.31 है।
मार्जिन, नकदी प्रवाह और एग्जीक्यूशन रिस्क
निवेशक कंपनी के लगातार गिरते स्टॉक के पीछे संभावित मार्जिन दबाव और एग्जीक्यूशन रिस्क को देख रहे हैं। Oriana Power ने डिविडेंड (Dividend) का भुगतान नहीं किया है, और कंपनी के वर्किंग कैपिटल डेज में 32.8 दिनों से बढ़कर 81.5 दिनों तक की भारी वृद्धि देखी गई है, जो संभावित नकदी प्रवाह प्रबंधन (cash flow management) चुनौतियों का संकेत देती है। कंपनी पर ₹316 करोड़ का कर्ज भी है, जो मार्केट कैप के हिसाब से बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन ग्रीन अमोनिया जैसे कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स के लिए इस पर ध्यान देना जरूरी है। शेयर बाजार की वर्तमान चाल बता रही है कि निवेशक SECI कॉन्ट्रैक्ट की मांग की निश्चितता की बजाय इन एग्जीक्यूशन जोखिमों और मार्जिन दबावों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
आगे का रास्ता: ग्रीन ट्रांजिशन की चुनौतियां
Oriana Power का ग्रीन फ्यूल्स में प्रवेश, भारत के महत्वाकांक्षी ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों का फायदा उठाने और लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत $2.5 बिलियन की विदेशी मुद्रा बचाने और रोजगार सृजित करने का अनुमान है। यह देखना होगा कि कंपनी अपनी रिन्यूएबल एनर्जी विशेषज्ञता को लाभदायक ग्रीन अमोनिया उत्पादन में कैसे बदल पाती है। निवेशकों की पैनी नजर प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट टाइमलाइन, परिचालन दक्षता (operational efficiency) और वास्तविक उत्पादन लागतों पर रहेगी, ताकि इस नई पहल की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और लाभप्रदता का आकलन किया जा सके।