महाराष्ट्र सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए लैंड ट्रांसफर फीस को पूरी तरह माफ कर दिया है। इस फैसले से कंपनियों को अपने प्रोजेक्ट्स के लिए लैंड ट्रांसफर करने में आसानी होगी और अपफ्रंट कैपिटल कॉस्ट में कमी आएगी।
महाराष्ट्र सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए लैंड ट्रांसफर फीस पर 25% की छूट का ऐलान किया है। अब तक, जब कंपनियां अपनी पैरेंट कंपनी से जमीन को स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) यानी अपनी सहायक कंपनियों में ट्रांसफर करती थीं, तो उन्हें 25% की भारी फीस देनी पड़ती थी। इस कदम से अब कंपनियों का शुरुआती खर्च (Upfront Capital Cost) काफी कम हो जाएगा।
फाइनेंसिंग में कैसे आएगी आसानी?
अक्सर लेंडर्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस किसी बड़ी कंपनी के बजाय उसके स्पेसिफिक प्रोजेक्ट (SPV) को लोन देना पसंद करते हैं। इस प्रोसेस को 'रिंग-फेंसिंग' कहा जाता है। पहले, जमीन ट्रांसफर करने पर 'रेडी रेकनर' वैल्यू के आधार पर बड़ी लेवी देनी पड़ती थी, जो बिजनेस की दक्षता के लिए एक टैक्स की तरह काम करती थी। अब इस बोझ के हटने से सोलर और विंड एनर्जी के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाना आसान होगा।
गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कड़ी शर्तें
सरकार ने इस छूट का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए सख्त नियम भी बनाए हैं। यह वेवर तभी मिलेगा जब जमीन का उपयोग केवल रिन्यूएबल एनर्जी के लिए होगा। यदि डेवलपर ने जमीन का इस्तेमाल रेजिडेंशियल या कमर्शियल काम के लिए किया, तो यह छूट रद्द कर दी जाएगी और सरकार ब्याज समेत पूरी 25% फीस की वसूली करेगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
यह पॉलिसी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इन्वेस्टर अब यह ट्रैक कर रहे हैं कि क्या इस फैसले से राज्य में नए प्रोजेक्ट्स के शुरू होने की गति बढ़ेगी। अगर यह मॉडल सफल रहा, तो अन्य राज्य भी इसी तरह के पॉलिसी बदलाव अपना सकते हैं, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी की लागत में और गिरावट आ सकती है।
