Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) ने इंडस्ट्रियल एनर्जी एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए Concentrating Solar Thermal (CST) तकनीक के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह पहल मैन्युफैक्चरर्स को फॉसिल फ्यूल की जगह क्लीन एनर्जी अपनाने में मदद करेगी।
सोलर थर्मल तकनीक क्या है?
भारत ने अब तक सोलर फोटोवोल्टिक (PV) के जरिए बिजली बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया है, लेकिन अब सरकार इंडस्ट्रीज की हीटिंग जरूरतों के लिए Concentrating Solar Thermal (CST) को बढ़ावा दे रही है। यह तकनीक शीशों का उपयोग करके सूरज की रोशनी को सीधे हीट में बदलती है। स्टील, सीमेंट और फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योगों को भारी तापमान की जरूरत होती है, जिसे पूरा करने के लिए फिलहाल कोयले और गैस जैसे फॉसिल फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता है, जो लागत और प्रदूषण दोनों बढ़ाते हैं।
नई पहल और हाइब्रिड सिस्टम
सरकार का मकसद 'टेम्परेचर गैप' की समस्या को खत्म करना है। MNRE के नए प्रपोजल में सोलर थर्मल को हीट पंप्स या कंप्रेस्ड एयर स्टोरेज सिस्टम के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य है कि कैसे कमर्शियल लेवल पर हाई-टेंपरेचर हीटिंग हासिल की जा सके।
निवेशकों के लिए संकेत
यह कदम सरकार की लॉन्ग-टर्म डीकार्बोनाइजेशन रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, यह तकनीक अभी रिसर्च के शुरुआती दौर में है। कैपिटल गुड्स और इंडस्ट्रियल बॉयलर बनाने वाली कंपनियों के लिए यह भविष्य में एक नया निश (niche) मार्केट बन सकता है।
सावधानी: निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इस तकनीक में बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत और भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) जैसी चुनौतियां अभी बरकरार हैं। ऐसे में, इस सेक्टर में आने वाली कंपनियों और प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर नजर रखना मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है।
