पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण देरी का सामना कर रही नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को सरकार से बड़ी राहत मिली है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए समय-सीमा को **4 महीने** बढ़ा दिया है।
प्रोजेक्ट्स को मिला 'फोर्स मेजर' का सहारा
MNRE ने 21 अगस्त 2026 को जारी एक एडवाइजरी में साफ किया है कि जिन प्रोजेक्ट्स की कंप्लीशन डेट 28 फरवरी 2026 या उसके बाद थी, उन्हें अब 4 महीने की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी। यह फैसला इस बात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के कारण जरूरी इक्विपमेंट और कच्चे माल की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इस कदम को 'फोर्स मेजर' (अप्रत्याशित घटना) के तौर पर देखा जा रहा है, जो डेवलपर्स को मुश्किल परिस्थितियों से बचाता है।
पेनल्टी से बचाव, लेकिन लागत का टेंशन जारी
इस एक्सटेंशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्रोजेक्ट डेवलपर्स अब पेनल्टी से बच सकेंगे। डेडलाइन मिस करने पर कंपनियों को बैंक गारंटी जब्त होने, रोजाना एक्सटेंशन फीस भरने और टैरिफ में कटौती जैसी वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था। यह राहत सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI), NHPC, NTPC, और SJVN जैसी एजेंसियों के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी।
हालांकि, डेडलाइन बढ़ने से डेवलपर्स को कुछ राहत तो मिली है, पर लागत बढ़ने की चिंता अभी भी बनी हुई है। सोलर सेल और कॉपर जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि आने वाले महीनों में इन वजहों से प्रोजेक्ट की कुल लागत 20% तक बढ़ सकती है। तय टैरिफ पर प्रोजेक्ट्स का काम कर रहे डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों के लिए इस फैसले का असल फायदा रेग्युलेटरी एक्शन पर निर्भर करेगा। इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि अगर पावर मिनिस्ट्री और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमीशन (CERC) जैसे रेग्युलेटर्स इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) चार्जेज में छूट जारी रखते हैं और ग्रिड कनेक्टिविटी के फायदे बने रहते हैं, तभी यह राहत पूरी तरह काम आ पाएगी। इसके अलावा, पावर कटेलमेंट जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर बाधाओं से कंपनियां कैसे निपटती हैं, इस पर भी नजर रखनी होगी।
