KPI Green Energy: बड़े प्रोजेक्ट्स मिले, पर शेयर क्यों लुढ़का? जानें वजह

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AuthorAditya Rao|Published at:
KPI Green Energy: बड़े प्रोजेक्ट्स मिले, पर शेयर क्यों लुढ़का? जानें वजह
Overview

KPI Green Energy ने हाल ही में **92.4 MW** का एक बड़ा विंड पावर प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चालू किया है और Adani Group से भी बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं। इसके बावजूद, कंपनी के शेयर में पिछले एक महीने में **10%** से ज्यादा की गिरावट आई है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

प्रोजेक्ट्स की झड़ी, पर मार्केट क्यों उदास?

KPI Green Energy Limited ने गुजरात में Ayana Renewable Power Four के लिए 92.4 मेगावाट (MW) का विंड पावर प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट में 28 विंड टर्बाइन जनरेटर शामिल थे, और KPI Green ने इसके बैलेंस ऑफ प्लांट, पावर सबस्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा काम संभाला। इसे सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) से ज़रूरी मंज़ूरी भी मिल गई है।

इसके ठीक बाद, कंपनी ने Kutch, Gujarat में Adani Group की कंपनियों के लिए 300 MWac/405 MWdc हाइब्रिड रिन्यूएबल प्रोजेक्ट पर इलेक्ट्रिकल, सिविल और अन्य काम करने के बड़े ऑर्डर भी हासिल किए हैं। ये उपलब्धियां कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को डिलीवर करने की लगातार क्षमता को दर्शाती हैं। इसके साथ ही, कंपनी का ऑर्डर बुक बढ़कर 3.61 GW हो गया है और इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 1.12 GW को पार कर गई है।

ऑपरेशनल सफलता और स्टॉक में गिरावट का खेल

इतनी शानदार ऑपरेशनल सफलताओं के बावजूद, KPI Green Energy के स्टॉक का प्रदर्शन थोड़ा अलग तस्वीर पेश कर रहा है। 20 फरवरी 2026 को शेयर में मामूली उछाल देखा गया, लेकिन पिछले एक महीने में यह 10% से ज्यादा गिर चुका है। यह गिरावट इस बात के विपरीत है कि भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को ग्लोबल स्तर पर नए मौके मिल रहे हैं। हाल ही में, फरवरी 2026 में हुए एक US-India ट्रेड डील से भारतीय सोलर एक्सपोर्ट पर टैरिफ कम हुआ है, जिससे सेक्टर में उम्मीदें बढ़ी हैं।

हालांकि, सेक्टर को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है, जैसे ग्लोबल कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण सोलर मॉड्यूल की कीमतें बढ़ना और सप्लाई चेन में संभावित बाधाएं। ओवरऑल मार्केट सेंटिमेंट पर अन्य सेक्टरों, खासकर IT में कमजोरी का भी असर दिख रहा है। पिछले एक साल में, KPI Green का स्टॉक इंडियन मार्केट और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री, दोनों से पीछे रहा है। यह अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है और RSI 38.9 के साथ न्यूट्रल-से-बियरिश टेक्निकल आउटलुक दिखा रहा है।

वैल्यूएशन: क्या सब ठीक है?

KPI Green Energy का मौजूदा P/E रेशियो लगभग 17-19 के आसपास है, जो भारतीय बाजार के औसत P/E (23.2x) और सेक्टर के औसत से काफी बेहतर लगता है। यह प्रमुख कॉम्पिटिटर Adani Green Energy के P/E रेशियो (लगभग 117.6x) से भी काफी कम है। 19 फरवरी 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹7,805 करोड़ था।

हालांकि, विश्लेषकों की राय मिली-जुली है। कुछ ₹733.00 के टारगेट प्राइस के साथ 'बाय' की सलाह दे रहे हैं, जो अच्छी-खासी अपसाइड पोटेंशियल का संकेत देता है। वहीं, कुछ स्रोतों का कहना है कि विस्तृत विश्लेषक प्राइस टारगेट कम हैं या भविष्य की कमाई का अनुमान लगाने के लिए पर्याप्त ऐतिहासिक डेटा नहीं है। मार्केट कैप और रेवेन्यू के मामले में Adani Green Energy एक बहुत बड़ी कंपनी है, लेकिन KPI Green ने हाल ही में क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर नेट प्रॉफिट ग्रोथ में बेहतर प्रदर्शन किया है।

चिंता का सबब: कर्ज और मार्जिन पर दबाव?

निवेशकों की चिंता का एक कारण KPI Green Energy की फाइनेंशियल स्ट्रक्चर और ऑपरेशनल मार्जिन को लेकर भी हो सकती है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.95:1 है, जो थोड़ा ज़्यादा माना जा सकता है। साथ ही, इसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं बताया जा रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर कच्चे माल, जैसे चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ रहा है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर भी दबाव आ सकता है।

इसके अलावा, कंपनी के पास भले ही बड़ी ज़मीन और पावर इवैक्यूएशन कैपेसिटी हो, लेकिन इस पूरी कैपेसिटी को लगातार और फायदेमंद जनरेशन में बदलना एक मुख्य चुनौती बनी हुई है। विश्लेषकों की कवरेज में अनिश्चितता यह भी बताती है कि मार्केट अब ग्रोथ स्टॉक में केवल क्षमता विस्तार के बजाय मार्जिन स्थिरता और बैलेंस शीट की मजबूती पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है।

आगे की राह: लक्ष्य बड़े, चुनौतियां भी

आगे देखें तो, KPI Green Energy ने 2030 तक 10 GW से ज़्यादा रिन्यूएबल कैपेसिटी का लक्ष्य रखा है। हाइब्रिड सॉल्यूशंस पर कंपनी का फोकस और बढ़ता ऑर्डर बुक ग्रोथ की नींव रखते हैं। Ayana प्रोजेक्ट का पूरा होना और Adani का बड़ा ऑर्डर इसकी ऑपरेशनल क्षमता को दिखाता है। हालांकि, बढ़ती इनपुट कॉस्ट को मैनेज करने, कर्ज के स्तर को संभालने और स्टॉक के मोमेंटम को बेहतर बनाने की कंपनी की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के बदलते नियमों और ग्लोबल सप्लाई चेन के बीच, KPI Green यह कैसे भुनाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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