सोलर मैन्युफैक्चरर Jupiter International ने 2027 में IPO लाने की तैयारी की है। इस IPO से कंपनी ₹3,000 करोड़ जुटाकर TopCon सेल्स और वेफर प्रोडक्शन में विस्तार करेगी। कंपनी का लक्ष्य इस फाइनेंशियल ईयर में अपनी सालाना कमाई को बढ़ाकर ₹3,200 करोड़ करना है।
₹3,000 करोड़ का मेगा विस्तार और IPO की तैयारी
सोलर सेल बनाने वाली भारतीय कंपनी Jupiter International Ltd ने 2027 की पहली तिमाही में अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने का ऐलान किया है। यह कदम कंपनी की तेजी से बढ़ती क्षमता विस्तार योजना का हिस्सा है। 2009 में सिर्फ 30 MW क्षमता से शुरुआत करने वाली यह कंपनी अब करीब 4.5 GW तक पहुंच चुकी है। कंपनी के हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में प्लांट हैं, और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का काम तेजी से चल रहा है।
नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और कमाई का लक्ष्य
अपने विकास की रणनीति को गति देने के लिए, कंपनी ₹3,000 करोड़ का बड़ा निवेश कर रही है। इस योजना का एक अहम हिस्सा नागपुर में 3 GW की TopCon सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाना है। इस प्लांट से दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, जिससे कंपनी की कुल सेल क्षमता मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के अंत तक लगभग 7.5 GW हो जाएगी। इसके अलावा, कंपनी नागपुर में ही 5 GW की इंगोट और वेफर प्लांट लगाने की भी योजना बना रही है, जिसके अगले 20 महीनों में पूरा होने की संभावना है।
इस विस्तार का सीधा असर कंपनी की कमाई पर दिखेगा। पिछले फाइनेंशियल ईयर में करीब ₹975 करोड़ की कमाई के बाद, मैनेजमेंट का अनुमान है कि चालू फाइनेंशियल ईयर में यह आंकड़ा बढ़कर ₹3,200 करोड़ तक पहुंच जाएगा। यह जबरदस्त उछाल जनवरी से जुलाई 2026 के बीच शुरू हुए तीन नए प्लांट्स से उत्पादन बढ़ने की वजह से संभव होगा।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
घरेलू बाजार के अलावा, Jupiter International अमेरिका में भी कारोबार शुरू करने की संभावनाएं तलाश रही है, संभवतः स्थानीय साझेदारियों के जरिए। रिन्यूएबल एनर्जी की वैश्विक मांग बढ़ने का फायदा उठाने के साथ-साथ, इस सेक्टर में कुछ चुनौतियां भी हैं। सोलर पावर की रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई के लिए इंटीग्रेटेड स्टोरेज सॉल्यूशंस की जरूरत होती है। सोलर पावर भले ही थर्मल पावर के मुकाबले सस्ता हो, लेकिन इन प्रोजेक्ट्स की आर्थिक व्यवहार्यता बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी की घटती कीमतों पर निर्भर करती है।
निवेशकों के लिए, नागपुर प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना और बड़े पूंजी निवेश का वित्तीय प्रभाव मुख्य बिंदु रहेंगे। कंपनी फिलहाल मुनाफे में है, लेकिन ₹3,000 करोड़ के निवेश प्रोग्राम में भारी कर्ज लेना पड़ सकता है, जिससे कंपनी के बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को IPO के लिए जरूरी सरकारी मंजूरी और विस्तार के साथ-साथ मुनाफा बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर भी नजर रखनी चाहिए। 2027 में IPO तक पहुंचने के लिए जटिल रेगुलेटरी माहौल और नई वेफर मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी को अपनाने की क्षमता कंपनी के प्रदर्शन के लिए अहम साबित होगी।
