Vena Energy India की डील में तेज हुई रफ्तार
Global Infrastructure Partners (GIP), जो अब Blackrock के पूर्ण स्वामित्व में है, द्वारा बेचे जा रहे Vena Energy India के 1.1 GW के रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म को लेकर अधिग्रहण की बातचीत तेज हो गई है। इस प्लेटफॉर्म का वैल्यूएशन लगभग ₹4,500-5,000 करोड़ आंका जा रहा है। यह वैल्यूएशन उन ऑपरेशनल रिन्यूएबल एसेट्स के लिए प्रीमियम को दर्शाता है जिनके पास लंबी अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) हैं, जो औसतन 17 साल के हैं और ₹4.5 प्रति यूनिट की दर पर हैं। वर्तमान में, प्लेटफॉर्म में 957 MW की ऑपरेटेड क्षमता और 59 MW निर्माण अधीन है।
प्रमुख घरेलू दावेदारों, जिनमें Jindal Renewables, INOXGFL Group, और Edelweiss की Sekura Energy शामिल हैं, एक्टिव ड्यू डिलिजेंस कर रही हैं। अगले महीने तक बाइंडिंग बिड्स (binding bids) आने की उम्मीद है, जो इस महत्वपूर्ण M&A इवेंट के शीघ्र समापन का संकेत देता है। GFL Limited (INOXGFL Group की लिस्टेड कंपनी) का शेयर प्राइस 10 अप्रैल 2026 को ₹476.30 करोड़ के मार्केट कैप पर था। इसका P/E रेश्यो 55.1 से 391 तक फैला हुआ है, जो संभावित वैल्यूएशन भिन्नताओं को दर्शाता है। Jindal Renewables एक प्राइवेट कंपनी है जिसने FY24 में ₹27.2 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि Sekura Energy एक इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तौर पर काम करती है।
भारत का रिन्यूएबल सेक्टर और M&A का दौर
भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और ग्लोबल लीडर बनने की ओर अग्रसर है। 31 मार्च 2026 तक, देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 283.46 GW को पार कर गई थी, जिसमें सोलर पावर मुख्य चालक है। FY 2025-26 में रिकॉर्ड 45 GW सोलर क्षमता का इजाफा हुआ है, जिसने M&A एक्टिविटी को बढ़ावा दिया है। प्लेटफॉर्म अधिग्रहण, जिसमें पूरी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियां शामिल हैं, तेजी से स्केल करने की एक प्रमुख रणनीति बन गई है।
Actis, Sembcorp, KKR, और Macquarie जैसे ग्लोबल प्लेयर्स का इस डील की शुरुआती बातचीत से बाहर निकलना महत्वपूर्ण है। यह घरेलू कंसॉलिडेशन पर फोकस या अलग वैल्यूएशन उम्मीदों का संकेत देता है। GIP ने मूल रूप से इस प्लेटफॉर्म को 2017 में $5 बिलियन में खरीदा था, और वर्तमान वैल्यूएशन $480-535 मिलियन है।
वैल्यूएशन पर सवाल और भविष्य का आउटलुक
₹4,500-5,000 करोड़ का वैल्यूएशन जांच का विषय है। लंबी अवधि के PPAs वाले एसेट्स आकर्षक हैं, लेकिन घरेलू खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा कीमतों को बढ़ा सकती है। GFL Limited जैसे संभावित बिडर के P/E रेश्यो में अस्थिरता सेक्टर में वैल्यूएशन की जटिलताओं को उजागर करती है। वैश्विक निवेशकों का बाहर निकलना यह संकेत दे सकता है कि वर्तमान वैल्यूएशन अधिक हैं या एसेट उनकी रणनीति से मेल नहीं खाता।
भारत के 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के लक्ष्य को देखते हुए, सेक्टर में ग्रोथ और M&A की गतिविधियां जारी रहने की उम्मीद है। बाजार में और कंसॉलिडेशन की उम्मीद है, जहां रणनीतिक खरीदार स्केल बढ़ाना चाहते हैं और वित्तीय निवेशक स्थिर, लंबी अवधि का रिटर्न देख रहे हैं। 2026 की शुरुआत में EBITDA के लिए वैल्यूएशन मल्टीपल 16.3x के आसपास स्थिर हो रहे हैं।