एनर्जी सिक्योरिटी और बढ़ती डिमांड से सेक्टर को बूस्ट
दुनिया भर में भू-राजनीतिक (geopolitical) बदलावों के बीच भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। इसी को देखते हुए Jefferies ने भारतीय पावर सेक्टर, खासकर रिन्यूएबल एनर्जी पर अपनी राय अपडेट की है। ब्रोकरेज का कहना है कि सिर्फ कैपेसिटी बढ़ाने वाली कंपनियों के बजाय, जो कंपनियां एनर्जी ट्रांजिशन (energy transition) को बेहतर तरीके से एग्जीक्यूट कर रही हैं, उन पर ध्यान देना चाहिए।
पावर डिमांड में दमदार वापसी की उम्मीद
Jefferies का अनुमान है कि FY25-30 के बीच भारत की रिन्यूएबल कैपेसिटी बढ़कर 359 GW तक पहुंच सकती है। शुरुआती सुस्ती के बाद, FY27 तक पावर डिमांड में 6% की तेज ग्रोथ लौटने की उम्मीद है। अल नीनो (El Nino) का मौसम पर असर भी पावर डिमांड बढ़ा सकता है, खासकर घरों और खेती से, जो भारत की कुल बिजली खपत का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल करते हैं।
पावर जनरेशन के लिए टॉप पिक्स
Jefferies ने पावर जनरेशन सेगमेंट में JSW Energy को अपना टॉप पिक बताया है। इसे 'BUY' रेटिंग के साथ ₹660 का टारगेट प्राइस दिया गया है, जो लगभग 35% के ग्रोथ की संभावना दिखाता है। वहीं, NTPC को भी 'BUY' रेटिंग मिली है और इसका टारगेट प्राइस ₹440 है, जो करीब 16% की ग्रोथ का संकेत देता है। दोनों कंपनियां पावर की बढ़ती जरूरतें और रिन्यूएबल्स को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों का फायदा उठाने के लिए तैयार दिख रही हैं। NTPC का मार्केट कैप लगभग ₹1.7 लाख करोड़ है और पी/ई (P/E) 18x के आसपास है। वहीं, JSW Energy का मार्केट कैप करीब ₹60,000 करोड़ है और इसका पी/ई (P/E) अक्सर 40s के बीच रहता है। Tata Power (पी/ई ~55x, मार्केट कैप ~₹1.2 लाख करोड़) की तुलना में NTPC का वैल्यूएशन आकर्षक दिख रहा है, जबकि JSW Energy का प्रीमियम वैल्यूएशन इसकी ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग में किसे मिलेगी बढ़त?
सोलर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में Jefferies ने Premier Energies और Emmvee को पसंद किया है। इन कंपनियों के फाइनेंशियल और ऑर्डर बुक मजबूत बताए गए हैं। डोमेस्टिक कंपोनेंट (घरेलू पुर्जों) के इस्तेमाल को अनिवार्य करने वाले सरकारी नियमों का सीधा फायदा इन कंपनियों को मिलेगा। हालांकि, ये दोनों कंपनियां प्राइवेट हैं। पब्लिक इन्वेस्टर्स के लिए Borosil Renewables एक विकल्प हो सकता है, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹15,000 करोड़ और पी/ई (P/E) अक्सर 60x से ऊपर रहता है। लेकिन यह एक महंगी डील हो सकती है। Waaree Energies जैसी अन्य बड़ी कंपनियां भी प्राइवेट हैं। Adani Green Energy (मार्केट कैप ~₹2.5 लाख करोड़) जैसे स्टॉक्स में हमने पिछले समय में बड़ी उतार-चढ़ाव देखी है, जो इस सेक्टर की वोलेटिलिटी को दर्शाता है।
जोखिम और एग्जीक्यूशन की चुनौतियां
हालांकि, इस सेक्टर में जोखिम भी हैं। प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी सरकारी सपोर्ट में राजनीतिक या आर्थिक बदलावों के कारण उतार-चढ़ाव आ सकता है। रिन्यूएबल पावर के विस्तार के लिए ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर (grid infrastructure) में बड़े अपग्रेड की जरूरत है, जो अक्सर कैपेसिटी बढ़ने की रफ्तार से पीछे रह जाते हैं। सोलर मैन्युफैक्चरर्स को पॉलीसिल्कॉन (polysilicon) की वैश्विक कीमतों में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी योजनाओं जैसे PM Suryaghar और PM Kusum पर निर्भरता भी कंपनियों को पॉलिसी एडजस्टमेंट के जोखिम में डालती है। Borosil Renewables जैसी कंपनियों को भी कड़ी ग्लोबल प्रतिस्पर्धा और बढ़ते लागत के कारण मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
भारतीय ग्रीन एनर्जी सेक्टर का भविष्य
कुल मिलाकर, एनर्जी सिक्योरिटी और बढ़ती डोमेस्टिक डिमांड के दम पर भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर बड़े विकास के लिए तैयार है। JSW Energy और NTPC जैसी कंपनियां इस मौके का फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में हैं। हालांकि, उनके टारगेट प्राइस तक पहुंचने के लिए मजबूत एग्जीक्यूशन, लागत नियंत्रण और रेगुलेटरी माहौल को समझना महत्वपूर्ण होगा।
