International Solar Alliance (ISA) ने अगले पांच वर्षों में **3 गीगावाट** अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लिए **$1 बिलियन** का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भारत के नेतृत्व में यह पहल विकासशील देशों में बिजली की महंगी दरों को कम करने और भारतीय कंपनियों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय अवसर खोलने का काम करेगी।
बिजली की लागत में भारी कटौती का लक्ष्य
इस फंड का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में बिजली के बिलों को कम करना है जहां ऊर्जा की लागत बहुत ज्यादा है। फिजी और मॉरीशस जैसे कई विकासशील देश अभी डीजल और तेल आयात पर निर्भर हैं, जिससे वहां बिजली की दरें ₹25 से ₹30 प्रति यूनिट तक पहुंच जाती हैं। ISA सोलर और बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को जोड़कर इन्हें सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों से बदलने की योजना बना रहा है। अनुमान है कि इस बदलाव से ऊर्जा लागत में लगभग दो-तिहाई तक की कमी आ सकती है।
भारत की रणनीतिक भूमिका
भारत को लगातार तीसरी बार ISA का अध्यक्ष चुना गया है और फ्रांस उपाध्यक्ष के रूप में बना रहेगा। भारत के नेतृत्व में, ISA प्राइवेट सेक्टर के निवेश को सुरक्षित बनाने के लिए नए पॉलिसी फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है। इससे भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरर्स और EPC कंपनियों के लिए अफ्रीका और प्रशांत क्षेत्रों के प्रोजेक्ट्स में तकनीक और विशेषज्ञता प्रदान करने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि यह पहल शानदार है, लेकिन इसके सामने कुछ वित्तीय और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियां भी हैं। एक अंतर-सरकारी संगठन के रूप में, ISA पारंपरिक राजस्व के बजाय सदस्य देशों और संस्थानों के स्वैच्छिक योगदान पर निर्भर है, जिससे फंडिंग में अनिश्चितता बनी रह सकती है। साथ ही, अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में रेगुलेटरी और राजनीतिक बाधाएं प्रोजेक्ट्स की गति को धीमा कर सकती हैं। निवेशकों के लिए असली परीक्षा 3 गीगावाट क्षमता को समय पर धरातल पर उतारने की होगी।
