Inox Wind Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के नतीजे दो अलग-अलग कहानी बयां कर रहे हैं।
स्टैंडअलोन परफॉरमेंस (Standalone Performance):
कंपनी का रेवेन्यू 16.55% बढ़कर ₹1,081.92 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹928.28 करोड़ था। इसी तरह, नेट प्रॉफिट (PAT) में 115.65% की जबरदस्त उछाल देखी गई और यह ₹126.33 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹58.58 करोड़ था। हालांकि, सबसे बड़ी चिंता की बात EBITDA को लेकर है, जो 54.06% की भारी गिरावट के साथ ₹191.08 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल यह ₹415.92 करोड़ था। तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) बेसिस पर भी EBITDA में 75.06% की कमी आई है।
कंसॉलिडेटेड परफॉरमेंस (Consolidated Performance):
दूसरी ओर, कंसॉलिडेटेड लेवल पर तस्वीर काफी बेहतर दिख रही है। कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 32.51% बढ़कर ₹1,207.45 करोड़ रहा, वहीं कंसॉलिडेटेड PAT 14.12% की बढ़ोतरी के साथ ₹126.65 करोड़ दर्ज किया गया। कंसॉलिडेटेड EBITDA में भी 8.55% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹312.59 करोड़ पर पहुंच गया।
नतीजों की क्वालिटी और चिंताएँ:
इन नतीजों में एक बड़ा विरोधाभास है। जहाँ कंसॉलिडेटेड आंकड़े ग्रोथ दिखा रहे हैं, वहीं स्टैंडअलोन EBITDA का इतना गिरना चिंता का विषय है। बता दें कि पिछले साल के स्टैंडअलोन PAT पर ₹13.46 करोड़ के असाधारण आइटम (संदिग्ध ICD के लिए प्रावधान) का असर था, जो इस तिमाही में नहीं है। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) को कॉन्ट्रैक्ट अवधि में स्ट्रेट-लाइन बेसिस पर पहचाना जाता है। कंसॉलिडेटेड वर्क-इन-प्रोग्रेस इन्वेंटरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (₹170.37 करोड़) प्रोजेक्ट डेवलपमेंट से जुड़ा है, जिसकी वसूली भविष्य में सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगी।
SPV निवेश पर बड़ा खतरा:
नतीजों के बीच सबसे बड़ा लाल झंडा ₹55.78 करोड़ के SPV (स्पेशल पर्पज व्हीकल) निवेश को लेकर है। Inox Wind Limited ने विंड फार्म प्रोजेक्ट्स के लिए अपनी 6 स्टेप-डाउन सब्सिडियरी (SPVs) में यह निवेश किया है। इन SPVs को कई बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है: प्रोजेक्ट कंप्लीशन की समय-सीमा खत्म हो चुकी है, एक्सटेंशन एप्लीकेशन खारिज हो गए हैं, और बैंक गारंटीज़ को इन्वोक (Invoke) कर लिया गया है। एक अपील को भी रिजेक्ट कर दिया गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि अगर IGESL इन SPVs से फंड रिकवर नहीं कर पाती है, तो इसका भुगतान Inox Wind को करना पड़ सकता है। यह राइट-ऑफ (Write-off) या कंटिंजेंट लायबिलिटी (Contingent Liability) का एक बड़ा रिस्क है। इस मामले में APTEL में अपील लंबित है।
अन्य जोखिम और भविष्य की राह:
ऑडिटर्स ने पेंडिंग लिटिगेशन (Pending Litigation) पर भी ध्यान दिलाया है। कंपनी का मानना है कि इन अपीलों में सफलता मिलेगी और वित्तीय स्टेटमेंट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कंपनी नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के असर का भी आकलन कर रही है, जिनके नियम अभी नोटिफाई होने बाकी हैं। मैनेजमेंट ने भविष्य के लिए कोई खास आउटलुक (Outlook) या फाइनेंशियल टारगेट नहीं दिया है। आगे की रेवेन्यू वसूली भविष्य की नीतिगत घोषणाओं पर निर्भर करेगी, जिससे आने वाली तिमाहियों में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को SPV निवेश से जुड़े APTEL अपील के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।