एग्जीक्यूशन की बड़ी चूक
वित्तीय वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों (9M FY26) में Inox Wind ने गाइडेंस के मुकाबले काफी कम, यानी सिर्फ 0.6 गीगावाट (GW) विंड टरबाइन (wind turbine) इंस्टॉल किए। जबकि कंपनी ने 1.2 GW का लक्ष्य रखा था। इन देरी की वजह 'राइट ऑफ वे' (right of way) के मुद्दे और ग्रिड इवैक्यूएशन (grid evacuation) की दिक्कतें हैं। इन बाधाओं के कारण ICICI Securities जैसे ब्रोकरेज हाउस ने FY26 के लिए रेवेन्यू अनुमानों (revenue estimates) को 66 अरब रुपये से घटाकर 50 अरब रुपये कर दिया है। इन चिंताओं के चलते, शेयर 16 फरवरी 2026 को अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹97.53 पर आ गया था, जो पिछले साल के प्रदर्शन से बिलकुल उलट है।
वैल्यूएशन और ऑर्डर बुक में बड़ा गैप
इन ऑपरेशनल दिक्कतों के बावजूद, Inox Wind का मौजूदा TTM P/E रेशियो लगभग 31.15 है, जो इसके पीयर (peer) Suzlon के 19.23 TTM P/E से काफी ज्यादा है। यह तब है जब Inox Wind एग्जीक्यूशन में देरी से जूझ रहा है। दूसरी ओर, Suzlon की बैलेंस शीट (balance sheet) मजबूत है और प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) के आंकड़े बेहतर हैं, फिर भी उसका वैल्यूएशन मल्टीपल (valuation multiple) कम है। Inox Wind के पास 3.2 GW का मजबूत ऑर्डर बुक (order book) है और उसकी सहयोगी कंपनी Inox Green का 13.3 GW O&M पोर्टफोलियो (portfolio) है, जिससे FY27 तक 6 अरब रुपये का रेवेन्यू आने की उम्मीद है। मगर, असली चुनौती इस पाइपलाइन को बिना बार-बार की देरी के इंस्टॉल्ड कैपेसिटी (installed capacity) और रेवेन्यू में बदलना है।
कंपनी की कमजोरियां
लगातार आ रही ऑपरेशनल दिक्कतें और कमजोर फाइनेंशियल स्ट्रक्चर (financial structure) Inox Wind के लिए बड़े रिस्क (risk) पैदा कर रहे हैं। कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकल (working capital cycle) 210 दिनों तक पहुंच गया है, जो लिक्विडिटी (liquidity) और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) के लिए बड़ा झटका है। इससे भी चिंता की बात यह है कि मैनेजमेंट ने अब "आगे से एग्जीक्यूशन गाइडेंस (execution guidance) देना बंद कर दिया है"। यह एक बड़ा बदलाव है जो प्रोजेक्ट की टाइमलाइन (timeline) का भरोसा न होने का इशारा देता है। इसके विपरीत, Suzlon का डेट-टू-इक्विटी (debt-to-equity) रेशियो 0.05 है और ROE (41.3%) व ROCE (32.4%) जैसे प्रॉफिटेबिलिटी आंकड़े Inox Wind के 13.2% ROE और 11.5% ROCE की तुलना में काफी बेहतर हैं। बार-बार की एग्जीक्यूशन देरी, ज्यादा वर्किंग कैपिटल का बोझ और तुलनात्मक रूप से कमजोर प्रॉफिटेबिलिटी, यह इशारा देते हैं कि सेक्टर में भले ही तेजी हो, इन वैल्यूएशन पर Inox Wind की रिकवरी की उम्मीदें शायद ज्यादा लगाई जा रही हैं।
आगे का रास्ता
एनालिस्ट्स (analysts) की राय बंटी हुई है। जहां ICICI Securities ने आकर्षक फॉरवर्ड वैल्यूएशन (forward valuations) का हवाला देते हुए 'Buy' रेटिंग और ₹130 का टारगेट बनाए रखा है, वहीं कुछ अन्य ब्रोकरेज ने रेटिंग कम कर दी है। JM Financial ने एग्जीक्यूशन चिंताओं के चलते 'Buy' से 'Add' कर दिया है, और MarketsMOJO ने 16 फरवरी 2026 को 'Sell' रेटिंग दी, जो गिरते फंडामेंटल्स (fundamentals) का संकेत है। एक रिपोर्ट के अनुसार, एनालिस्ट्स ने फेयर वैल्यू एस्टीमेट (fair value estimate) को ₹201 से घटाकर करीब ₹160 कर दिया है। हालांकि, अभी भी कई एनालिस्ट्स की ओर से 'Buy' की सिफारिशें आ रही हैं, लेकिन कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपनी गहरी एग्जीक्यूशन चुनौतियों से पार पा पाती है या नहीं और अपने वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट (working capital management) में सुधार कर पाती है या नहीं।