Shirdi Sai Electricals ग्रुप की कंपनी Indosol Solar अगले महीने आंध्र प्रदेश में अपना नया सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने जा रही है। खास बात यह है कि यह प्लांट अमेरिका को सोलर कंपोनेंट्स एक्सपोर्ट करने पर केंद्रित है। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि यह एक प्राइवेट कंपनी है और इसे लिस्टेड Indosolar Limited से भ्रमित न करें।
बड़ा निवेश और अमेरिकी मार्केट पर नजर
आंध्र प्रदेश के रामायपटनम में लगने जा रहा यह प्लांट ₹3,000 करोड़ के भारी निवेश से तैयार हो रहा है। इसका मुख्य मकसद सोलर इंगोट और वेफर्स का उत्पादन करना है, जो सोलर सप्लाई चेन का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। कंपनी की स्ट्रैटेजी अमेरिका के उन मैन्युफैक्चरर्स को टारगेट करने की है, जो चीनी सामान के विकल्प तलाश रहे हैं।
क्यों न हो भ्रम?
बाजार में सक्रिय निवेशकों को एक बात साफ समझ लेनी चाहिए: Indosol Solar एक प्राइवेट कंपनी है और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। अक्सर निवेशक इसे Indosolar Limited समझ लेते हैं, जो कि Waaree Energies द्वारा अधिग्रहित एक अलग लिस्टेड कंपनी है। इन दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है, इसलिए निवेश के फैसलों में सावधानी बरतें।
टेक्नोलॉजी और भविष्य की योजनाएं
कंपनी ने इस प्लांट के लिए 1.2 GW की शुरुआती क्षमता तय की है, जिसे आगे चलकर 20 GW तक ले जाने का लक्ष्य है। भारत सरकार की PLI स्कीम का फायदा उठा रही यह कंपनी ऐसे वेफर्स बनाएगी जिनकी सेल एफिशिएंसी 25.5% तक हो सकती है।
चुनौतियां और रिस्क
इतने बड़े स्केल पर काम शुरू करने में मशीनरी सेटअप और कच्चे माल जैसे Polysilicon की सप्लाई चेन को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इसके अलावा, ग्लोबल कॉम्पिटिशन, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और फॉरेन एक्सचेंज रेट्स का असर भी कंपनी के मुनाफे पर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर चीन की जगह कितनी मजबूती से ले पाती हैं।
