भारत का बड़ा सोलर लक्ष्य
नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2026 तक सालाना सोलर इंस्टॉलेशन में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन जाएगा। यह तेजी पिछली उपलब्धियों से कहीं आगे है, जहाँ पहले 50 GW तक पहुंचने में 11 साल लगे थे, और अगले 50 GW के लिए लगभग तीन साल लगे थे।
सोलर पावर में रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार
NSEFI का अनुमान है कि सोलर एनर्जी कैपेसिटी 280-300 GW तक पहुंच सकती है, जो भारत के 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल एनर्जी सोर्स का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। वर्तमान गति को देखते हुए, भारत सालाना 50 GW की नई क्षमता जोड़ सकता है। 'पीएम सूर्य घर', आने वाला 'पीएम कुसुम 2.0', फ्लोटिंग सोलर पॉलिसियां और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन जैसी सरकारी पहलें अगले चार वर्षों में इस विस्तार को गति देंगी।
वैश्विक रुझान और भारत के ख़ास कारण
जहां अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे बड़े बाजारों में कैपेसिटी एडिशन्स में थोड़ी नरमी दिख रही है, वहीं भारत अपनी रिन्यूएबल एनर्जी को तेजी से बढ़ा रहा है। इस ग्रोथ का मुख्य कारण डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE) और कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल (C&I) सोलर सेगमेंट हैं। C&I सेक्टर ने उम्मीदों को पार करते हुए पहली बार सालाना 10 GW के करीब डबल-डिजिट इंस्टॉलेशन दर्ज किए हैं। ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस, वर्चुअल पावर परचेज एग्रीमेंट्स (VPPAs) और रिन्यूएबल कंजम्पशन ऑब्लिगेशन (RCO) जैसे नियम मांग को बढ़ा रहे हैं। उम्मीद है कि C&I कैपेसिटी एडिशन्स जल्द ही यूटिलिटी-लेड पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) के बराबर पहुंच जाएंगे। DRE, जो फिलहाल कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी का 20% है, 2030 तक 35% तक पहुंचने का अनुमान है।
मैन्युफैक्चरिंग और स्टोरेज का भविष्य
प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम, अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM), और बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) जैसे उपायों से भारत की डोमेस्टिक मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी काफी मजबूत हुई है। हालांकि, अगले चरण के विकास के लिए वेफर्स, इंगॉट्स, पॉलीसिलिकॉन और क्वार्ट्ज जैसी अपस्ट्रीम सप्लाई चेन्स को मजबूत करने की जरूरत होगी। भविष्य में, इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी ग्रोथ देखी जा रही है, जिसमें एनर्जी स्टोरेज एक अहम भूमिका निभाएगा। NSEFI का अनुमान है कि वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और नॉन-सोलर आवर कनेक्टिविटी जैसी पॉलिसियों के चलते भारत अगले 18 महीनों में डबल-डिजिट एनर्जी स्टोरेज कैपेसिटी हासिल कर लेगा।