India Solar Cell Mandate: देश में सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट्स अटके? शॉर्टेज का डर, दाम बढ़ने की आशंका

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Solar Cell Mandate: देश में सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट्स अटके? शॉर्टेज का डर, दाम बढ़ने की आशंका
Overview

भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) ने जून में लागू होने वाले एक अहम नियम की समीक्षा शुरू कर दी है। इस नियम के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं में सिर्फ घरेलू स्तर पर निर्मित (domestically manufactured) सोलर सेल का इस्तेमाल जरूरी होगा। हालांकि, देश की मौजूदा क्षमता (capacity) मांग को पूरा करने के लिए काफी कम है, जिससे सोलर सेल की भारी कमी और प्रोजेक्ट्स में देरी होने का बड़ा डर सता रहा है।

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क्षमता का भारी गैप, कमी का डर

दरअसल, भारत की घरेलू सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी (manufacturing capacity) फिलहाल करीब 25.6 गीगावाट (GW) है, जबकि सालाना मांग लगभग 50 गीगावाट (GW) तक पहुंचने का अनुमान है। यह एक बड़ा गैप है, जिसके कारण देश को अभी भी सोलर सेल के लिए 90% से ज्यादा इम्पोर्ट (imports) पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमें चीन का दबदबा है। यह नया नियम, जो स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए है, अनुपालन (compliant) करने वाले सेल की कमी पैदा कर सकता है। इंडस्ट्री ग्रुप्स का कहना है कि अगर इसे तुरंत लागू किया गया तो भारत की 170 गीगावाट (GW) सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बाधित हो सकती है और रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि स्थानीय स्तर पर बने करीब 55% सोलर सेल पुरानी टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं।

पॉलिसी के लक्ष्य और बाजार की हकीकत में टकराव

'आत्मनिर्भर भारत' और 'आत्मनिर्भर ऊर्जा' की दिशा में भारत का कदम 2070 तक नेट-जीरो (net-zero) उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति का अहम हिस्सा है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) जैसी योजनाओं ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाने में मदद की है। उम्मीद है कि दिसंबर 2025 तक भारत की मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी लगभग 210 गीगावाट (GW) तक पहुंच जाएगी, लेकिन सेल प्रोडक्शन कैपेसिटी उसी अवधि तक करीब 27 गीगावाट (GW) रहने का अनुमान है, जो मांग से काफी कम है।

बढ़ सकती हैं कीमतें, प्रोजेक्ट्स हो सकते हैं लेट

2026 तक ग्लोबल सोलर पैनल की कीमतें बढ़ने की आशंका है, जिसका कारण भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions), बढ़ी हुई ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स लागत (logistics costs) और चीन की सप्लाई पर सख्ती है। इसके अलावा, चीन द्वारा 1 अप्रैल, 2026 से सोलर PV मॉड्यूल पर वैट एक्सपोर्ट रिफंड (VAT export refund) को 9% से घटाकर 0% करने का फैसला भी वैश्विक कीमतों को प्रभावित करेगा। ऐसे में, भारत के डोमेस्टिक मैंडेट से डेवलपर्स के लिए ये कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी का खतरा और बढ़ जाएगा।

पिछली नीतियां भी रहीं महंगी

पहले भी भारत में लोकल कंटेंट (local content) की आवश्यकता वाली नीतियों को लेकर आलोचनाएं हुई हैं। स्टडीज के मुताबिक, ऐसी नीतियां सोलर PV पावर की लागत को प्रति किलोवाट-घंटा (kWh) लगभग 6% तक बढ़ा सकती हैं और भारतीय सोलर पैनल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा बना सकती हैं, जबकि निर्यात (exports) या टेक्नोलॉजी को खास बढ़ावा नहीं मिलता। वर्तमान सोलर सेल मैंडेट, भले ही ऊर्जा सुरक्षा और विकास के लक्ष्यों से प्रेरित हो, पर इसमें भी यही जोखिम हैं।

इंडस्ट्री की मांग: पॉलिसी में मिले देरी

सोलर प्रोजेक्ट डेवलपर्स मंत्रालय से इस नियम को लागू करने में करीब 9 महीने की देरी या फेज्ड रोलआउट (phased rollout) की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे लगभग 50 गीगावाट (GW) की नई डोमेस्टिक सोलर सेल कैपेसिटी, जो अभी बन रही है, समय पर चालू हो सकेगी और सप्लाई की तत्काल कमी को दूर किया जा सकेगा। मंत्रालय का फैसला भारत के ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन (green energy transition) की गति और लागत पर बड़ा असर डालेगा।

भारत 2026 में सालाना इंस्टॉलेशन के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बनने की ओर अग्रसर है। इंडस्ट्री की यह मांग इस चुनौती को उजागर करती है कि कैसे मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ को पॉलिसी की समय-सीमा से मिलाया जाए। सरकार का निर्णय यह तय करेगा कि भारत 2030 तक अपने 500 गीगावाट (GW) नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी (non-fossil fuel capacity) के लक्ष्य को हासिल करने की राह पर कितनी तेजी से आगे बढ़ पाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.