Biomass Power: भारत में **28 GW** की अपार संभावनाएं, लेकिन लॉजिस्टिक्स की मार से फंसी राह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Biomass Power: भारत में **28 GW** की अपार संभावनाएं, लेकिन लॉजिस्टिक्स की मार से फंसी राह

भारत में कृषि अवशेषों से बिजली बनाने की **28 GW** की क्षमता छिपी है, जो कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए अहम है। हालांकि, 'SAMARTH' मिशन के बावजूद सप्लाई चेन की दिक्कतों और पेमेंट में देरी के कारण यह सेक्टर अभी भी चुनौतियों से जूझ रहा है।

भारत में कृषि अवशेषों, जैसे पराली से बिजली पैदा करने की 28 GW की विशाल क्षमता मौजूद है। यह क्षमता न केवल देश की पीक इलेक्ट्रिसिटी डिमांड का एक हिस्सा पूरा कर सकती है, बल्कि कोयले पर निर्भरता को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है। सरकार ने इस दिशा में 'SAMARTH' मिशन शुरू किया है, जिसके तहत थर्मल पावर प्लांट्स को कोयले के साथ बायोमास पेलेट्स का मिश्रण करना अनिवार्य है।

असली चुनौती क्या है?

इस योजना के साथ सबसे बड़ी समस्या लॉजिस्टिक्स की है। कोयले की तरह बायोमास का सप्लाई चेन फिक्स्ड नहीं है। कटाई का समय सीमित होता है और स्टोरेज की कमी के कारण किसान इसे इकट्ठा करने के बजाय जलाना बेहतर समझते हैं। वहीं, थर्मल प्लांट्स के लिए अपनी पुरानी मशीनों को बायोमास के अनुकूल बनाना भी एक महंगा और चुनौतीपूर्ण काम है।

ऑपरेटर्स के सामने जोखिम

पेलेट बनाने वाली कंपनियों और पावर प्लांट ऑपरेटर्स के लिए 3 मुख्य जोखिम बड़े हैं:

  • क्वालिटी में उतार-चढ़ाव: नमी और खराब क्वालिटी के कारण प्लांट के बॉयलर्स की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है।
  • पेमेंट में देरी: बड़ी यूटिलिटी कंपनियों से समय पर पेमेंट न मिलने के कारण छोटे ऑपरेटर्स के लिए कैश फ्लो की दिक्कतें बनी हुई हैं।
  • प्राइसिंग: कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता के कारण लंबे समय के लिए प्रोजेक्ट्स को सस्टेनेबल बनाना मुश्किल हो रहा है।

निवेशकों के लिए सलाह है कि वे केवल 28 GW के आंकड़ों पर न जाएं। असली ग्रोथ तब दिखेगी जब फीडस्टॉक एग्रीगेशन सेंटर्स बनेंगे और पेमेंट स्ट्रक्चर में सुधार होगा। जब तक रूरल बायो-इकोनॉमी स्टेबल नहीं होती, तब तक इस सेक्टर में सावधानी बरतने की जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.