टैरिफ क्लैरिफिकेशन का असर
बुधवार को अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) के भारत से इम्पोर्ट होने वाले सोलर सेल्स और मॉड्यूल्स पर लगभग 126% की शुरुआती काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाने के फैसले के बाद भारतीय सोलर स्टॉक्स में भारी गिरावट आई थी। Waaree Energies और Premier Energies जैसे बड़े प्लेयर्स के शेयर्स में क्रमशः 15% और 14.2% तक की गिरावट दर्ज की गई थी।
लेकिन, गुरुवार को मार्केट में रिकवरी देखने को मिली। कई ब्रोकरेज फर्म्स (Brokerage Firms) ने स्पष्ट किया कि ये ड्यूटी मुख्य रूप से उन मॉड्यूल्स पर लागू होगी जिनमें 'इंडिया-मेड' सोलर सेल्स का इस्तेमाल हुआ हो। इस क्लैरिफिकेशन (Clarification) के बाद Waaree Energies के शेयर्स ₹2,705 के आसपास ट्रेड करने लगे, हालांकि दिन के आखिर तक इसमें 10.5% की गिरावट रही। Premier Energies ने भी अपनी गिरावट को कुछ कम किया और 5.9% गिरकर ₹731.5 पर बंद हुआ। वहीं, सोलर ग्लास मैन्युफैक्चरर Borosil Renewables के शेयर में 2% से ज़्यादा की मामूली तेज़ी देखी गई। यह तेज़ी इस बात का संकेत है कि कंपनियां जो इम्पोर्टेड सेल्स का इस्तेमाल करके मॉड्यूल एक्सपोर्ट करती हैं, उन पर सीधा असर कम पड़ेगा।
सेक्टर की पोजीशन और भविष्य
भारतीय सोलर सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है और अनुमान है कि 2026 तक यह अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बन जाएगा। डोमेस्टिक डिमांड और सरकार की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की नीतियों का इसमें बड़ा हाथ है। Waaree Energies के पास Q2 FY26 तक ₹47,000 करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक है, जिसमें 60% ओवरसीज कस्टमर्स का हिस्सा है। कंपनी अपनी मॉड्यूल और सेल कैपेसिटी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। Premier Energies के पास इसी अवधि में ₹13,246 करोड़ का ऑल-डोमेस्टिक ऑर्डर बुक है। रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ के मामले में Waaree Energies आगे दिखती है, जिसका Q3 FY26 में पैट (PAT) 118% YoY बढ़कर ₹1,107 करोड़ रहा, जबकि Premier Energies का Q3 FY26 का पैट (PAT) सिर्फ ₹13 करोड़ था।
एक्सपोर्ट रिस्क और चुनौतियां
'सेल ओरिजिन' क्लैरिफिकेशन से मिली राहत के बावजूद, भारतीय सोलर एक्सपोर्टर्स के लिए स्ट्रक्चरल रिस्क बने हुए हैं। अमेरिका एक महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट मार्केट है, जहाँ 2024 में भारतीय सोलर गुड्स का एक्सपोर्ट $792.6 मिलियन तक पहुँच गया था। लेकिन, लगाई गई ड्यूटी के कारण ऐसा एक्सपोर्ट अब महंगा और गैर-लाभकारी हो जाएगा। इसके अलावा, एंटी-डंपिंग जांच (Anti-dumping investigation) के नतीजे अगले महीने आ सकते हैं, जिससे और पेनल्टी लग सकती है। भारत के डोमेस्टिक सोलर वैल्यू चेन में वेफर प्रोडक्शन की कमी एक बड़ी कमजोरी है, जिससे इम्पोर्ट पर निर्भरता बनी रहती है।
एनालिस्ट्स की राय
एनालिस्ट्स (Analysts) फिलहाल सतर्कता के साथ आशावादी हैं। कई ब्रोकरेज फर्म्स ने Waaree Energies को 'बाय' रेटिंग दी है, जिसका टारगेट प्राइस ₹3,867 तक है। Premier Energies को भी कुछ एनालिस्ट्स ने 'बाय' रेटिंग दी है, लेकिन टारगेट प्राइस ₹1,000 के आसपास है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म्स CVDs के तत्काल प्रभाव को कम बता रही हैं, पर ट्रेड पॉलिसी की अनिश्चितता और अमेरिका जैसे बड़े मार्केट पर निर्भरता पर कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है।