भारतीय रिन्यूएबल सेक्टर का बजट 2026 पर फोकस: फंडिंग और नीति स्पष्टता की उम्मीद

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारतीय रिन्यूएबल सेक्टर का बजट 2026 पर फोकस: फंडिंग और नीति स्पष्टता की उम्मीद
Overview

भारत के नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) क्षेत्र ने 2030 का गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य (non-fossil capacity target) समय से पहले हासिल कर लिया है और अब बजट 2026 की तैयारी में है। पिछले साल लगभग 50 GW क्षमता जोड़ने के बावजूद, उद्योग को उच्च वित्तपोषण लागत (high financing costs), भूमि अधिग्रहण में देरी (land acquisition delays), और ग्रिड बाधाओं (grid constraints) जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हितधारक विकास की गति बनाए रखने और महत्वाकांक्षी 500 GW गैर-जीवाश्म बिजली लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वित्त मंत्री से मजबूत नीतिगत संकेतों, बढ़ी हुई बजटीय सहायता और राजकोषीय प्रोत्साहनों (fiscal incentives) का आग्रह कर रहे हैं।

500 GW का लक्ष्य: बाधाओं के बीच निरंतर प्रयास

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र, अपनी तेज विस्तार की गति को बनाए रखने के लिए केंद्रीय बजट 2026 से महत्वपूर्ण वित्तीय हस्तक्षेप (fiscal intervention) और नीतिगत स्पष्टता (policy clarity) की तलाश कर रहा है। भारत ने पहले ही 2030 के लिए अपने गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता लक्ष्य को पार कर लिया है, जो वर्तमान में 262 GW है। इस महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए निरंतर सरकारी प्रोत्साहन की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, उद्योग को 500 GW के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कई महत्वपूर्ण कारकों से चुनौती मिल रही है, जिन्हें बजट में संबोधित किए जाने की उम्मीद है।

बुनियादी ढांचा और वित्तपोषण के अंतर को दूर करना

उच्च वित्तपोषण लागत, जो वर्तमान में 10% से 12% है, एक महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई है। यह प्रतिस्पर्धी नीलामी दरों (auction tariffs) के मुकाबले परियोजना लागत को बढ़ाती है। उद्योग के नेताओं का मानना ​​है कि इन उधार लागतों को 10% से नीचे लाने से अतिरिक्त ₹1-1.5 लाख करोड़ का निजी निवेश अनलॉक हो सकता है। इसे और बढ़ाना ग्रिड की बाधाएं हैं, जहां अपर्याप्त ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे के कारण नवीकरणीय बिजली का 5-10% हिस्सा बाधित (curtailment) हो रहा है। इसके अलावा, बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता (battery energy storage capacity) में भी भारी कमी है, जिसकी अनुमानित 236 GWh की आवश्यकता के मुकाबले केवल 0.8 GWh उपलब्ध है।

नीति और कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करना

नौकरशाही की बाधाएं, विशेष रूप से भूमि अधिग्रहण, जो कई राज्यों में 12-18 महीने तक खिंच सकती है, परियोजना पाइपलाइनों को धीमा कर रही हैं। बिजली खरीद समझौतों (power purchase agreements) में देरी और पीएम सूर्य घर (PM Surya Ghar) जैसी प्रमुख योजनाओं में विक्रेता गुणवत्ता या पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) के लिए किसान वित्तपोषण अंतराल जैसे मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उद्योग सामूहिक रूप से सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं की मांग कर रहा है, जिसमें एकल-खिड़की भूमि मंजूरी प्राधिकरण (single-window land clearance authority) और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय (coordination) शामिल है।

राजकोषीय समर्थन और विनिर्माण प्रोत्साहन

बजट के लिए प्रमुख मांगों में पूंजीगत सब्सिडी (capital subsidies) बढ़ाना और पॉलीसिलिकॉन (polysilicon) जैसे घटकों के लिए विशेष रूप से घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (production-linked incentives - PLI) का विस्तार करना शामिल है। कर युक्तिकरण (tax rationalization), आवश्यक घटकों पर सीमा शुल्क में राहत, और ट्रांसमिशन तथा ओपन-एक्सेस शुल्कों पर (open-access charges) संभावित छूट (waivers) भी एजेंडे में सबसे ऊपर हैं। इन उपायों से परियोजना व्यवहार्यता (project viability) में वृद्धि होने और तेजी से व्यावसायिक अपनाने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत हरित ऊर्जा नवाचारों (green energy innovations) और टिकाऊ औद्योगिक विकास में (sustainable industrial growth) अग्रणी बन सके।

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