Energy Sector: रिन्यूएबल एनर्जी का दम, 2030 तक भारत बचाएगा **$100 अरब**

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Energy Sector: रिन्यूएबल एनर्जी का दम, 2030 तक भारत बचाएगा **$100 अरब**

भारत 2030 तक फॉसिल फ्यूल इम्पोर्ट कॉस्ट में **$100 अरब** की अतिरिक्त बचत करने की राह पर है। रिन्यूएबल एनर्जी में बढ़ता निवेश जहां एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूती दे रहा है, वहीं निवेशकों को कैपिटल कॉस्ट और DISCOM पेमेंट जैसे रिस्क पर भी नजर रखनी होगी।

भारत अगले पांच वर्षों में फॉसिल फ्यूल के आयात खर्च में लगभग $100 अरब की भारी बचत करने के लिए तैयार है। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत, जीन-एरिक पैकेट ने 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' में यह अहम जानकारी साझा की। यह बचत 2010 से अब तक की गई $100 अरब की बचत के अलावा होगी, जो देश की एनर्जी मिक्स में विविधता लाने का परिणाम है।

मैन्युफैक्चरिंग और निवेश का नया दौर

भारत के 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2027 से 2030 के बीच लगभग $220 अरब के निवेश की जरूरत है। सरकार की PLI स्कीम और ALMM जैसे फ्रेमवर्क इस क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। आज स्थिति यह है कि चीन के बाहर होने वाली सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग का 50% हिस्सा भारत से आता है।

सेक्टर के सामने मौजूद चुनौतियां

हालांकि लॉन्ग-टर्म आउटलुक पॉजिटिव है, लेकिन निवेशकों को कुछ मटेरियल रिस्क को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • कैपिटल और फाइनेंसिंग: रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में भारी पूंजी की जरूरत होती है। हाई इंटरेस्ट रेट्स मार्जिन्स पर दबाव डाल रहे हैं, और फॉरेन डेट एक्सपोजर के कारण करेंसी हेजिंग का खर्च भी बढ़ जाता है।
  • DISCOM पेमेंट का संकट: स्टेट-ओनड पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) द्वारा पेमेंट में देरी एक पुरानी समस्या है, जिससे इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स के कैश फ्लो पर असर पड़ता है।
  • कच्चे माल पर निर्भरता: सोलर मॉड्यूल बनाने में हम आगे तो हैं, लेकिन वेफर्स और इंगॉट्स जैसे क्रिटिकल रॉ मटेरियल के लिए हम अभी भी आयात पर निर्भर हैं।
  • रेगुलेटरी अनिश्चितता: टैक्स स्ट्रक्चर और ALMM नियमों में बदलाव निवेशकों के लिए बिजनेस मॉडल और कैपिटल स्पेंडिंग प्लान को प्रभावित कर सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

आने वाले समय में कंपनियों का डेट लेवल मैनेज करना और सरकारी इंसेंटिव्स का फायदा उठाना सबसे जरूरी होगा। इसके अलावा, DISCOMs से समय पर पेमेंट मिलना सेक्टर की ऑपरेशनल हेल्थ का सबसे बड़ा इंडिकेटर बना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.