भारत और डेनमार्क ने 'Bharat Renewable Energy Summit 2026' में अपनी एनर्जी पार्टनरशिप को और मजबूत किया है। इस समझौते का मुख्य फोकस ऑफशोर विंड (Offshore Wind), ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रिड इंटीग्रेशन पर है, ताकि भारत अपने 2030 तक **100 GW** विंड एनर्जी के लक्ष्य को हासिल कर सके।
नई साझेदारी का आधार
नई दिल्ली में आयोजित 'Bharat Renewable Energy Summit and Expo 2026' में दोनों देशों के बीच भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को लेकर अहम चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और डेनमार्क के मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड ने इस दौरान रिन्यूएबल एनर्जी को नेशनल ग्रिड में बेहतर तरीके से जोड़ने की रणनीति पर जोर दिया।
आंकड़ों में भारत की प्रगति
भारत का नॉन-फॉसिल फ्यूल पावर कैपेसिटी का आंकड़ा अब 310 GW के पार पहुंच गया है। पिछले 2 सालों में 110 GW की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। वहीं, विंड एनर्जी के मोर्चे पर भी बड़ी हलचल है:
- FY26 में भारत ने अब तक की सबसे ज्यादा 6.05 GW विंड एनर्जी क्षमता जोड़ी है।
- विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी 2014 के 10 GW से बढ़कर अब 24 GW पर पहुंच गई है।
निवेश और भविष्य की चुनौतियां
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में पिछले 2 सालों में $67 बिलियन से अधिक का निवेश आया है, जिसमें $6.2 बिलियन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी शामिल है। हालांकि, बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे ऑफशोर विंड और ग्रीन हाइड्रोजन में तकनीकी जटिलता और एग्जीक्यूशन रिस्क अभी भी बने हुए हैं। निवेशकों की नजरें अब सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले नए टेंडर्स और प्रोजेक्ट्स की ग्राउंड-लेवल स्पीड पर टिकी हैं।
