Bharat Renewable Energy Summit 2026 में भारत ने अपने क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने का बड़ा प्लान पेश किया है। साल 2030 तक **500 GW** की क्षमता और **$220 बिलियन** के निवेश का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें ग्रिड और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास जोर दिया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित 'Bharat Renewable Energy Summit & Expo 2026' में क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को लेकर एक स्पष्ट निवेश रोडमैप तैयार किया गया है। मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी ने 2027 से 2030 के बीच लगभग $220 बिलियन की पूंजी की आवश्यकता बताई है, जो भारत के 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अनिवार्य है।
निवेश के प्रमुख स्तंभ
पिछले दो वर्षों में सेक्टर ने $67 बिलियन की फंडिंग हासिल की है। अब सरकार का फोकस तीन मुख्य क्षेत्रों पर है: लार्ज-स्केल सोलर और विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, और आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क। साथ ही, सरकार ने पंपड हाइड्रो और बैटरी स्टोरेज के लिए ₹14,500 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का आवंटन किया है ताकि प्रोजेक्ट्स को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।
चुनौतियां और जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'प्रोजेक्ट रियलाइजेशन' है। वर्तमान में लगभग 40 GW के क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जिन्हें अब तक ग्राहक नहीं मिले हैं, जो डेवलपर्स और लेंडर्स के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) पॉलिसी पर भी निवेशकों की नजर है। यह पॉलिसी घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को तो सुरक्षा देती है, लेकिन इससे नए प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को केवल निवेश के बड़े आंकड़ों के बजाय अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि जमीनी स्तर पर ग्रिड-कनेक्टेड कैपेसिटी कितनी तेजी से शुरू हो रही है। ट्रांसमिशन रोलआउट और नए स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की उपयोगिता (Utilization rate) ही तय करेगी कि यह सेक्टर लंबी अवधि में कितना मुनाफा देगा।
