भारत सरकार ने 2030 तक **500 GW** रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अगले चार वर्षों में **$220 बिलियन** के निवेश की जरूरत है, जिसका ब्लूप्रिंट नवंबर में होने वाले Bharat Renewable Energy Summit & Expo 2026 में पेश किया जाएगा।
भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में निवेश का एक नया दौर शुरू हो रहा है। देश के 500 GW के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगले 4 से 4.5 वर्षों में कुल $220 बिलियन के निवेश की योजना तैयार की गई है। मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्लोबल पेंशन फंड्स, प्राइवेट इक्विटी फर्म्स और बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के साथ बातचीत कर रही है।
फंड का एलोकेशन और सेक्टर-वार बंटवारा
निवेश के इस महायोजना में सबसे बड़ा हिस्सा सोलर एनर्जी के लिए रखा गया है, जिसमें करीब $70 बिलियन निवेश किए जाएंगे। इसके अलावा, पावर ग्रिड के विस्तार पर $40 बिलियन से $45 बिलियन खर्च किए जाएंगे, ताकि रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स को नेशनल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके।
वहीं, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए $20 बिलियन से $25 बिलियन ग्रीन हाइड्रोजन और $20 बिलियन एनर्जी स्टोरेज तकनीक के लिए आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, देश में ही सोलर मॉड्यूल्स के मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए $15 बिलियन से $20 बिलियन का बजट रखा गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
चुनौतियां और आगामी समिट
निवेश के ये आंकड़े भले ही बड़े लग रहे हों, लेकिन निवेशकों की नजर लैंड एक्विजिशन (land acquisition) और सरकारी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (Discoms) की फाइनेंशियल हेल्थ पर टिकी है। इन सभी योजनाओं पर अंतिम चर्चा नवंबर में होने वाले Bharat Renewable Energy Summit & Expo 2026 में की जाएगी, जो Bharat Mandapam में 2 से 5 नवंबर के बीच आयोजित होगा। यह समिट इंटरनेशनल सोलर एलायंस असेंबली के साथ मिलकर रिन्यूएबल सेक्टर को नई दिशा देने का काम करेगा।
