Ministry of New & Renewable Energy (MNRE) ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए **7.5 से 8 GW** नई विंड पावर क्षमता जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष के पहले 5 महीनों में **2.42 GW** क्षमता पहले ही जुड़ चुकी है।
भारत सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए 7.5 से 8 GW की नई विंड पावर क्षमता जोड़ने का आक्रामक लक्ष्य रखा है। यह कदम 2030 तक 100 GW की कुल विंड पावर क्षमता हासिल करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
बाजार की स्थिति और प्रोग्रेस
आंकड़ों पर गौर करें तो, 31 अगस्त 2026 तक देश की कुल इंस्टॉल्ड विंड क्षमता 58.52 GW तक पहुंच गई है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 5 महीनों (अप्रैल-अगस्त) में 2.42 GW की नई क्षमता का जुड़ना सेक्टर की बढ़ती रफ्तार को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इस विस्तार का सीधा फायदा घरेलू कंपनियों को मिलेगा। Suzlon Energy और Inox Wind जैसी टर्बाइन निर्माता कंपनियां इस बढ़े हुए ऑर्डर फ्लो से सीधे लाभान्वित हो सकती हैं। जैसे-जैसे नई क्षमताएं चालू होंगी, इक्विपमेंट मेकर्स के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी बेहतर होती जाएगी।
चुनौतियां और ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि लक्ष्य बड़े हैं, लेकिन सेक्टर को कुछ व्यावहारिक बाधाओं से निपटना होगा:
- लॉजिस्टिक हर्डल्स: जमीन अधिग्रहण और ट्रांसमिशन ग्रिड कनेक्टिविटी की गति प्रोजेक्ट्स को प्रभावित कर सकती है।
- रॉ मटेरियल कॉस्ट: स्टील और कॉपर जैसी बेसिक सामग्रियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
- ALMM का असर: सरकार का 'Approved List of Models and Manufacturers' (ALMM) पर फोकस है, जो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोटेक्ट करने के लिए क्वालिटी और लोकल कंटेंट स्टैंडर्ड्स तय करता है।
निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के ऑर्डर बुक, इंस्टॉलेशन रन-रेट और मार्जिन मैनेजमेंट पर नजर रखें, क्योंकि अवार्ड किए गए बिड्स को ऑपरेशनल फार्म में बदलना ही कंपनियों की असली कामयाबी तय करेगा।
