सरकार ने देश में विंड एनर्जी सेक्टर को रफ्तार देने के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने पुरानी विंड टर्बाइन्स को आधुनिक और अधिक क्षमता वाली मशीनों से बदलने (Repowering) की योजना का ऐलान किया है, ताकि **2030** तक **100 GW** के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने 8th Windergy India 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान इस महत्वकांक्षी योजना की घोषणा की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन पुराने विंड टर्बाइन्स को बदलना है जो अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। नई तकनीकों और हाई-कैपेसिटी इक्विपमेंट के इस्तेमाल से मौजूदा साइट्स पर ही बिजली उत्पादन को कई गुना बढ़ाया जा सकेगा।\n\n### जमीन की जरूरत नहीं, उत्पादन में होगा इजाफा\n\nइस रिपावरिंग (Repowering) प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें नई जमीन के अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी। तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से मौजूद विंड इंफ्रास्ट्रक्चर का ही इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रोजेक्ट्स की लागत कम होगी और रफ्तार बढ़ेगी।\n\n### 100 GW के लक्ष्य की ओर कदम\n\nभारत की वर्तमान विंड पावर कैपेसिटी लगभग 59 GW है। बीते फाइनेंशियल ईयर में 6.05 GW की नई क्षमता जोड़ी गई थी, जबकि चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में ही 3 GW क्षमता ग्रिड में शामिल हो चुकी है। सरकार का अनुमान है कि इस साल विंड एनर्जी इंस्टालेशन के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं।\n\n### निवेशकों के लिए जरूरी मॉनिटरेबल्स (Investor Monitorables)\n\nयह कदम जितना बड़ा है, उतनी ही चुनौतियां भी हैं। इसके लिए पुराने पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) को फिर से नेगोशिएट करना होगा। इसके अलावा, डिस्काम्स (Discoms) की खराब फाइनेंशियल हेल्थ और पेमेंट में देरी भी एक बड़ा मुद्दा है। निवेशकों को राज्यों में रेगुलेटरी पॉलिसी और सप्लाई चेन की स्थिति पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि यही तय करेगा कि कंपनियां कितनी तेजी से नए ऑर्डर्स को पूरा कर पाती हैं।
