भारत की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता **233 GW** तक पहुंच गई है, लेकिन सेल और वेफर उत्पादन में कमी के कारण सेक्टर में असंतुलन पैदा हो गया है। कम क्षमता उपयोग (Capacity Utilization) और अमेरिकी निर्यात पर भारी शुल्क के कारण छोटी असेंबलिंग कंपनियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा गैप
सितंबर 2026 तक भारत की सोलर मॉड्यूल असेंबली क्षमता 233 GW तक पहुंच गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, यह तेजी एक ऐसी समस्या लेकर आई है जिसने मैन्युफैक्चरर्स के प्रॉफिट मार्जिन को खतरे में डाल दिया है। मौजूदा समय में मॉड्यूल असेंबली और जरूरी कच्चे माल जैसे सेल और वेफर के उत्पादन के बीच बहुत बड़ा अंतर है।
आंकड़ों पर गौर करें तो सेल उत्पादन क्षमता मॉड्यूल क्षमता से लगभग 7 गुना कम है, और इंगाट-वेफर उत्पादन क्षमता तो 116 गुना तक कम है। इस निर्भरता के कारण भारतीय निर्माता ग्लोबल सप्लाई चेन के उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील हो गए हैं।
क्यों दबाव में हैं कंपनियां?
- लो कैपेसिटी यूटिलाइजेशन: वर्तमान में फैक्ट्रियां अपनी कुल क्षमता के केवल 35% से 40% पर ही चल रही हैं। फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी के लिए कम से कम 50% से 65% की दर जरूरी होती है।
- सप्लाई का ओवरलोड: पाइपलाइन में अभी 135 GW की अतिरिक्त क्षमता है, जिससे आने वाले समय में सप्लाई बहुत ज्यादा होने का खतरा है।
- प्राइस वार: साल 2025 में कंपनियों ने 25% का शानदार ऑपरेटिंग मार्जिन कमाया था, लेकिन अब बढ़ती प्रतिस्पर्धा से यह मार्जिन सिकुड़ सकता है। साथ ही, पुराने PERC टेक्नोलॉजी वाले प्लांट अब नई TOPCon तकनीक के सामने पिछड़ रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट की चुनौतियां
भारत के लिए मुसीबतें घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं। भारत अपने 4.5 GW मॉड्यूल एक्सपोर्ट का 97% अमेरिका भेजता था। लेकिन अब US Department of Commerce ने कई मामलों में 200% से अधिक की ड्यूटी लगा दी है, जिससे यह रास्ता लगभग बंद हो गया है। अब कंपनियों को मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और यूरोप जैसे नए बाजारों की तलाश करनी पड़ रही है।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
भविष्य में डेटा सेंटर्स और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से 17 GW से 22 GW की मांग आने की उम्मीद है, जो कुल क्षमता का एक छोटा हिस्सा है। ऐसे में निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो केवल असेंबलिंग पर निर्भर रहने के बजाय खुद की सेल और वेफर मैन्युफैक्चरिंग (Vertical Integration) कर रही हैं।
