रिकॉर्ड ग्रोथ ने यूटिलिटी-स्केल को दी रफ्तार
भारत के सौर ऊर्जा सेक्टर में 2025 के दौरान तेज़ी से विस्तार हुआ, जिसने रिकॉर्ड 36.6 GW नई क्षमताएं जोड़ीं। यह पिछले साल के मुकाबले 42.7% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी थी, जिससे साल के अंत तक देश की कुल स्थापित सौर क्षमता 135.5 GW को पार कर गई। इस ग्रोथ का बड़ा हिस्सा यूटिलिटी-स्केल (utility-scale) सेगमेंट से आया, जिसने अकेले 29.5 GW क्षमता को चालू किया। इस साल बाज़ार में बड़ा फेरबदल देखने को मिला, जहां प्रमुख सेगमेंट में 35 नई कंपनियों ने टॉप दस में जगह बनाई, जो बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते समीकरणों का संकेत देता है।
रूफटॉप और यूटिलिटी सेगमेंट में लीडर्स
यूटिलिटी-स्केल डेवलपर के तौर पर Adani Green Energy ने करीब 5 GW क्षमता स्थापित करके अपनी लीड बरकरार रखी। NTPC Green Energy 2 GW के साथ दूसरे स्थान पर रही, जो 2030 तक 60 GW रिन्यूएबल क्षमता के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। SJVN Green Energy ने राजस्थान में 1 GW क्षमता जोड़कर तीसरा स्थान हासिल किया। ओपन एक्सेस (open access) सेगमेंट में 7.8 GW क्षमता जुड़ी, जिसमें Gentari Renewables प्रमुख डेवलपर बनकर उभरी। रूफटॉप सोलर (rooftop solar) की बात करें तो Tata Power Solar ने 19% बाजार हिस्सेदारी के साथ अपनी शीर्ष स्थिति पक्की की।
ALMM-II से मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, बढ़ी प्रतिस्पर्धा
चीनी कंपनियां Trina Solar और Jinko Solar मॉड्यूल सप्लाई में अपनी धाक जमाए हुए थीं, लेकिन Waaree Energies घरेलू सप्लायर के रूप में सबसे आगे रही। आने वाली ALMM-II पॉलिसी से बड़े बदलाव की उम्मीद है, जिसका मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और सौर सेल के लिए चीनी इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना है। Goldi Solar ने सबसे ज़्यादा मॉड्यूल क्षमता जोड़ी, जबकि Waaree Energies ने अपनी कुल स्थापित क्षमता में बढ़त बनाए रखी। Waaree Energies ने फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) मार्च 2025 तक करीब ₹144.4 बिलियन का ज़बरदस्त रेवेन्यू दर्ज किया, जो दिसंबर 2025 तक $2.52 बिलियन के बराबर है।
वैल्यूएशन में अंतर और बाज़ार का दबाव
प्रमुख कंपनियों के फाइनेंशियल(financials) में अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। Adani Green Energy का P/E रेश्यो (April 2026 तक 100-120) भविष्य के लिए ज़बरदस्त ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है। वहीं, सरकारी दिग्गज NTPC का P/E रेश्यो 14-22 के बीच है, जो पावर इंडस्ट्री के औसत 21.65 से कम है। SJVN का P/E रेश्यो 30-42 के दायरे में रहा। निजी कंपनी Waaree Energies का बाज़ार मूल्यांकन (market capitalization) अप्रैल 2026 तक $9.5 बिलियन था। Gentari Renewables के पास भारत में 4.8 GW की यूटिलिटी-स्केल पोर्टफोलियो है और 2.0 GW और जोड़ने की योजना है। चीन के पॉलीसिलिकॉन, इंगोट और वेफर उत्पादन पर प्रभुत्व के बीच, भारत की ALMM-II के ज़रिए आत्मनिर्भरता की पहल सप्लाई चेन को फिर से संतुलित करने का लक्ष्य रखती है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव और कंसॉलिडेशन (consolidation) की संभावना बढ़ रही है।
एग्जीक्यूशन और पॉलिसी से जुड़े जोखिम
हालांकि भारत का सौर बाज़ार विकास के बड़े अवसर पेश करता है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हैं। Adani Green Energy और NTPC जैसे बड़े डेवलपर्स पर निर्भरता, 35 नई कंपनियों के आने से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, और ग्रिड कनेक्शन में देरी व ट्रांसमिशन की सीमाएं प्रोजेक्ट्स में देरी और रिटर्न को प्रभावित कर सकती हैं। Adani Green जैसे स्टॉक्स के हाई P/E रेश्यो बताते हैं कि बाज़ार में बड़ी उम्मीदें हैं, ऐसे में अगर एग्जीक्यूशन(execution) में कोई कमी आई तो जोखिम बढ़ सकता है।
उभरते बाज़ार में सकारात्मक आउटलुक
समर्थक सरकारी नीतियों, बढ़ती घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और व्यवसायों से मजबूत मांग के दम पर भारत के सौर सेक्टर का भविष्य सकारात्मक दिख रहा है। अब ज़्यादातर प्रोजेक्ट्स में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और हाइब्रिड सिस्टम शामिल हो रहे हैं, जो एक परिपक्व बाज़ार का संकेत है। उम्मीद है कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सरकारी समर्थन जारी रहेगा और बाज़ार के परिपक्व होने के साथ कंसॉलिडेशन (consolidation) बढ़ेगा, जिससे मजबूत एग्जीक्यूशन वाली कंपनियां आगे निकलेंगी।