Indian Solar Manufacturers Association (ISMA) ने **$89 अरब** के निवेश का रोडमैप पेश किया है। लक्ष्य **2047** तक भारत को सोलर मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाना है, लेकिन निवेशकों को फाइनेंसिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े जोखिमों पर भी नजर रखनी होगी।
'Vision 2047' का बड़ा रोडमैप
Indian Solar Manufacturers Association (ISMA) ने भारत को ग्लोबल सोलर मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाने के लिए एक बड़ा विजन पेश किया है। इस प्लान के तहत कुल $89 अरब का कैपिटल इंजेक्शन किया जाएगा, जिससे हम केवल मॉड्यूल असेंबली तक सीमित न रहकर पॉलिपिलिकॉन (polysilicon), इनगॉट्स (ingots) और वेफर्स (wafers) जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स के उत्पादन की ओर बढ़ेंगे।
बड़े लक्ष्य और चुनौतियां
रोडमैप के मुताबिक, 2047 तक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को 3,266 GW (मॉड्यूल) और 2,156 GW (पॉलिपिलिकॉन) तक ले जाने का लक्ष्य है। मुख्य उद्देश्य 2041 तक आयात (imports) पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना और ग्लोबल मार्केट में 26.5% हिस्सेदारी हासिल करना है।
हालांकि, जमीन पर ये आंकड़े हासिल करना आसान नहीं होगा। निवेशकों को कुछ गंभीर चुनौतियों को समझना होगा:
- ओवरसप्लाई का रिस्क: जरूरत से ज्यादा क्षमता निर्माण से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है, अगर डिमांड उतनी रफ्तार से न बढ़ी तो।
- कैपिटल और टेक्नोलॉजी: मॉड्यूल असेंबली के मुकाबले अपस्ट्रीम प्रोडक्शन बहुत अधिक कैपिटल-इंटेंसिव है। साथ ही, TOPCon जैसी नई और हाई-एफिशिएंसी टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल बिठाना बड़ी चुनौती होगी।
- कर्ज का बोझ: भारी फंडिंग की जरूरत कंपनियों के बैलेंस शीट पर दबाव डाल सकती है।
अंत में, निवेशकों के लिए सबसे जरूरी यह देखना होगा कि कंपनियां बिना बेतहाशा कर्ज लिए अपनी विस्तार योजनाओं को कैसे पूरा करती हैं और क्या वे जटिल मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में सफलता हासिल कर पाती हैं या नहीं।
