सरकार PM Surya Ghar योजना के अगले चरण में स्थानीय स्तर पर बने इनवर्टर और बैटरी के इस्तेमाल को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
भारत सरकार अपनी सोलर एनर्जी वैल्यू चेन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) अब इस योजना के तहत इनवर्टर और बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए 'लोकल मैन्युफैक्चरिंग' की शर्त अनिवार्य करने की योजना बना रही है। जैसे सोलर मॉड्यूल और सेल्स के लिए पहले नियम कड़े किए गए थे, अब वही रणनीति हार्डवेयर के लिए अपनाई जा रही है।
डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार
PM Surya Ghar स्कीम ने अक्टूबर 2026 तक 50 लाख से ज्यादा घरों में अपनी पहुंच बना ली है। सरकार ने इस योजना के लिए ₹75,021 करोड़ का बजट रखा है, जो 31 मार्च 2027 तक चलेगा। इंडस्ट्री बॉडी ISMA के अनुसार, रेजिडेंशियल सेक्टर में 115 GW की अपार संभावनाएं हैं, जिससे 2030 तक कुल रूफटॉप क्षमता 132 GW तक पहुंच सकती है। अगस्त 2026 में सरकार ने इनवर्टर डेटा को भारत में ही स्टोर करने का आदेश देकर साइबर सुरक्षा की ओर पहले ही कदम बढ़ा दिए थे।
चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि आत्मनिर्भरता का लक्ष्य बड़ा है, लेकिन राह आसान नहीं है। भारत अभी भी लिथियम, कैथोड और एनोड जैसे कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है। यदि सरकार बिना कच्चा माल उपलब्ध कराए मैन्युफैक्चरिंग मैंडेट लागू करती है, तो इससे प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है और कंज्यूमर्स के लिए लागत बढ़ सकती है। निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि क्या घरेलू कंपनियां इतनी तेजी से उत्पादन बढ़ा पाएंगी कि सोलर इंस्टालेशन की रफ्तार न धीमी हो। अगला बड़ा ट्रिगर सरकार की ओर से आने वाली आधिकारिक नोटिफिकेशन होगी, जो तय करेगी कि इस सेक्टर में आगे का निवेश कैसा रहेगा।
