Ministry of New and Renewable Energy ने Agrivoltaics के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया है। इस पहल के तहत **5 GW** क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है, जिससे एक ही जमीन पर सोलर पावर और खेती दोनों की जा सकेंगी।
भारत सरकार अब रिन्यूएबल एनर्जी और खेती को एक साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। Ministry of New and Renewable Energy एक नेशनल पॉलिसी ड्राफ्ट कर रही है, जिसके जरिए सोलर पैनल को ऊंची संरचनाओं (Stilted structures) पर लगाया जाएगा। इससे पैनल के नीचे इतनी जगह बनेगी कि किसान आसानी से फसल उगा सकेंगे। यह कदम उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का एक नया जरिया बनेगा, जो देश की खेती करने वाली आबादी का 85% हिस्सा हैं।
लागत और चुनौतियां
हालांकि यह मॉडल काफी फायदेमंद दिखता है, लेकिन सरकार के सामने 25% से 30% तक अधिक इंस्टॉलेशन लागत की चुनौती है। यह सामान्य सोलर प्लांट की तुलना में महंगा है क्योंकि इसमें खास तरह के स्ट्रक्चर की जरूरत होती है। इसे सफल बनाने के लिए सरकार PM-KUSUM 2.0 स्कीम के तहत वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives) देने पर विचार कर रही है, जिसका लक्ष्य 10 GW तक के एग्री-पीवी सेगमेंट तक पहुंचना है।
प्रमुख राज्य और भविष्य की राह
सरकार ने महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को इन प्रोजेक्ट्स के लिए हाई-पोटेंशियल क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है। इन राज्यों में कुल संभावित क्षमता का 50% हिस्सा मौजूद है। इस योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जर्मनी के साथ जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट्स भी शुरू किए जा रहे हैं ताकि भारतीय परिस्थितियों में एनर्जी और फसल की पैदावार के बीच संतुलन बनाया जा सके। आने वाले समय में सरकार पायलट प्रोजेक्ट्स लॉन्च करेगी और ड्राफ्ट पॉलिसी को पब्लिक कंसल्टेशन के लिए पेश किया जाएगा।
