Central Electricity Authority (CEA) ने नए नियम जारी किए हैं, जिसके तहत अब सोलर और विंड पावर प्रोजेक्ट्स के साथ बैटरी स्टोरेज लगाना जरूरी होगा। यह बदलाव 1 जुलाई 2027 से लागू होगा, जिससे प्रोजेक्ट्स की शुरुआती लागत बढ़ने का अनुमान है।
नियम का पूरा खाका
Central Electricity Authority (CEA) के नए ड्राफ्ट के अनुसार, 1 जुलाई 2027 या उसके बाद शुरू होने वाले सभी नए ग्राउंड-माउंटेड सोलर और ऑनशोर विंड प्रोजेक्ट्स में बैटरी स्टोरेज सिस्टम का होना अनिवार्य है। इस नियम का मकसद बिजली की बर्बादी (Curtailment) को रोकना और पावर ग्रिड को अधिक स्थिर बनाना है।
क्या हैं नए नियम?
- कैपेसिटी: डेवलपर्स को प्रोजेक्ट की कुल क्षमता का कम से कम 10% हिस्सा बैटरी स्टोरेज के रूप में रखना होगा।
- स्टोरेज ड्यूरेशन: शुरुआत में यह 2 घंटे का स्टोरेज होगा, जिसे जुलाई 2029 से जून 2031 के बीच शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए बढ़ाकर 4 घंटे कर दिया जाएगा।
- ग्रिड-फॉर्मिंग तकनीक: इन प्रोजेक्ट्स में कम से कम 15% इनवर्टर और सभी पावर कन्वर्जन सिस्टम में 'ग्रिड-फॉर्मिंग' तकनीक का होना जरूरी है, ताकि वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी को नियंत्रित रखा जा सके।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
यह कदम भले ही ग्रिड स्थिरता के लिए अच्छा हो, लेकिन रिन्यूएबल कंपनियों के लिए यह काफी महंगा साबित हो सकता है। प्रोजेक्ट्स में बैटरी और एडवांस्ड इनवर्टर लगाने से शुरुआती लागत (Upfront Cost) बढ़ जाएगी। अगर कंपनियां इस लागत को कंज्यूमर्स या डिस्कॉम्स (DISCOMs) पर नहीं डाल पाईं, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
आंकड़ों की बात करें तो, फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ही भारत में 8,133 GWh सोलर ऊर्जा बर्बाद (Curtail) हो गई थी। इस बर्बादी को कम करने के लिए सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है। फिलहाल, CEA ने इन नियमों पर 4 अक्टूबर 2026 तक जनता से सुझाव मांगे हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग और बैटरी तकनीक की उपलब्धता ही भविष्य में रिन्यूएबल कंपनियों के प्रदर्शन को तय करेगी।
