भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' की शुरुआत की है, जिसका लक्ष्य **5,000 MW** की फ्लोटिंग सोलर क्षमता तैयार करना है। यह प्रोजेक्ट जमीन की कमी से निपटने और पानी के स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए लॉन्च किया गया है, जिसमें **10,000 MWh** की बैटरी स्टोरेज भी शामिल है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) ने इस नई योजना को ₹5,070 करोड़ के बजट के साथ पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य 2030-31 तक 5,000 MW की फ्लोटिंग सोलर क्षमता हासिल करना है। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब सोलर पैनल लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि इन्हें जलाशयों और जल निकायों पर लगाया जाएगा।
बड़े आर्थिक प्रोत्साहन (Financial Incentives)
सरकार डेवलपर्स के लिए राह आसान करने के लिए कई तरह की सहायता दे रही है:
- सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस: प्रोजेक्ट पूरा होने पर ₹1 करोड़ प्रति MW की सीधी मदद।
- अध्ययन के लिए फंड: प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता और पर्यावरणीय जांच के लिए प्रति प्रोजेक्ट ₹50 लाख तक का सहयोग।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
अगर आप इस सेक्टर में निवेश के नजरिए से देख रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। फ्लोटिंग सोलर में पारंपरिक सोलर सिस्टम के मुकाबले 25% ज्यादा लागत आती है, क्योंकि इसमें खास तरह के स्ट्रक्चर और वाटरप्रूफिंग की जरूरत होती है। हालांकि, ग्रिड को स्थिर रखने के लिए 10,000 MWh की बैटरी स्टोरेज को साथ जोड़ना अनिवार्य है, जो प्रोजेक्ट की कुल लागत को बढ़ाता है।
तकनीकी तौर पर देखें तो जलाशय इंजीनियरिंग और लंबे समय तक पानी में रहने के कारण होने वाले जंग (corrosion) जैसी चुनौतियां भी बनी रहेंगी। भविष्य में सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले टेंडर्स और कंपनियों की लागत को नियंत्रित करने की क्षमता ही इस स्कीम की सफलता तय करेगी।
