नई दिल्ली आगामी बजट 2026 की तैयारियों के बीच उच्च-वोल्टेज नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक मजबूत पहल का संकेत दे रही है। यह पुन: केंद्रित जोर भारत की विकसित हो रही ऊर्जा नीति में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है, जिसका लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा, दीर्घकालिक शुद्ध-शून्य (net-zero) प्रतिबद्धताओं और आर्थिक विस्तार को संतुलित करना है।
सरकार ने एक आक्रामक क्षमता विस्तार योजना तैयार की है। लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तक पहुंचना है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2035 तक 105 GW नई थर्मल क्षमता जोड़ने और 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक बढ़ाने की योजनाएं भी हैं।
यह रणनीतिक दिशा प्रशासन की स्वच्छ ऊर्जा भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करती है, साथ ही ग्रिड विश्वसनीयता भी सुनिश्चित करती है। जैसे-जैसे बजट 2026 नजदीक आ रहा है, उद्योग पर्यवेक्षक संभावित नीतिगत प्रोत्साहनों, विनियामक ढांचे और निवेश के अवसरों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं जो इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को गति दे सकते हैं। नवीकरणीय, थर्मल और परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में काम करने वाली प्रमुख कंपनियां सुर्खियों में रहने की उम्मीद है।