केंद्र सरकार ने Green Energy Corridor Phase-III को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के जरिए **135 GW** रिन्यूएबल एनर्जी और **50 GWh** बैटरी स्टोरेज को सपोर्ट मिलेगा। कुल **₹1.86 लाख करोड़** के इस निवेश से पावर सेक्टर की कंपनियों को मजबूती मिलेगी।
बड़े प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधिकारिक तौर पर Green Energy Corridor Phase-III (GEC-III) को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का कुल बजट ₹1,86,405 करोड़ तय किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क को इतना सक्षम बनाना है कि वह 135 GW रिन्यूएबल एनर्जी को संभालने में सक्षम हो सके। इसमें 50 GWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी शामिल है। जनता पर बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार ने ₹54,082 करोड़ की सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस (CFA) का प्रावधान किया है।
ग्रिड की बाधाओं का समाधान
मौजूदा समय में ग्रिड कंजेशन (Grid Congestion) एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी का पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाता। नए ट्रांसमिशन लाइन्स और स्टोरेज के जुड़ने से यह समस्या हल होगी। इस प्रोजेक्ट के 2032-33 फाइनेंशियल ईयर तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।
पावर सेक्टर के लिए क्या है संकेत?
यह निवेश इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स और प्रोजेक्ट डेवलपर्स के लिए बड़े अवसरों के द्वार खोलेगा। सरकार इन प्रोजेक्ट्स को दो तरीकों से आगे बढ़ाएगी: नए प्रोजेक्ट्स के लिए Tariff Based Competitive Bidding (TBCB) और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए Cost Plus Basis का इस्तेमाल होगा। इससे ट्रांसमिशन लाइन्स और सब-स्टेशन बनाने वाली कंपनियों के पास ऑर्डर की लंबी कतार रहेगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
हालांकि यह सरकार का एक बड़ा और सकारात्मक कदम है, लेकिन निवेशकों को 'एग्जीक्यूशन रिस्क' (Execution Risk) पर नजर रखनी चाहिए। सफलता काफी हद तक स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज (STUs) की रफ्तार पर निर्भर करेगी। लैंड एक्विजिशन और रेगुलेटरी मंजूरियों में देरी प्रोजेक्ट के टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, बैटरी और ट्रांसमिशन उपकरणों के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार कितनी तेजी से होता है, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा।
