IREDA के दमदार लेंडिंग आंकड़े, फिर भी बाजार खामोश
Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए अपने प्रोविजनल (provisional) आंकड़े जारी किए हैं। कंपनी ने बताया कि लोन सैंक्शन (loan sanctions) में 9% की वृद्धि हुई है, जो पिछले साल के ₹47,453 करोड़ से बढ़कर ₹51,883 करोड़ हो गया। वहीं, लोन डिस्बर्समेंट (loan disbursements) में 16% की तगड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹30,169 करोड़ से बढ़कर ₹34,946 करोड़ तक पहुंच गई। इन आंकड़ों ने IREDA की बकाया लोन बुक को 22% तक बढ़ा दिया है, जो ₹76,282 करोड़ से बढ़कर ₹93,075 करोड़ हो गई है। ये आंकड़े भारत में रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) के लिए मजबूत मांग को दर्शाते हैं।
लेकिन, बाजार ने इन सकारात्मक परिचालन (operational) विकासों पर ठंडा रिएक्शन दिया है। सोमवार, 1 अप्रैल 2026 को IREDA का शेयर 4.82% गिरकर ₹108.8 पर बंद हुआ। यह शेयर अपने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) प्राइस ₹165 से काफी नीचे है और इस साल अब तक 22% लुढ़क चुका है। शेयर की गिरती कीमत और कंपनी के मजबूत वित्तीय आंकड़े एक बड़ा सवाल खड़े करते हैं, जिससे निवेशक वैल्यूएशन (valuation) की चिंताओं, लोन की मंजूरी की धीमी गति (किताब के मुकाबले), और अपडेट में एसेट क्वालिटी (asset quality) जैसे जरूरी आंकड़ों की कमी पर ध्यान दे रहे हैं।
नई फंडिंग और पीयर कम्पेरिजन (Peer Comparison)
IREDA को अपनी फंडिंग को मजबूत करने के लिए Sumitomo Mitsui Banking Corporation (SMBC) से ¥28 बिलियन (लगभग ₹15,000 करोड़) की एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग (ECB) सुविधा मिली है। यह पांच साल का अनसिक्योर्ड लोन (unsecured loan) भविष्य की रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं के लिए कंपनी की पूंजी बढ़ाएगा।
हालांकि, वैल्यूएशन के मामले में IREDA अपने पब्लिक सेक्टर साथियों, Power Finance Corporation (PFC) और REC Limited से काफी पीछे है। मार्च 2026 तक, IREDA का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 16.3 था, जबकि PFC का P/E लगभग 3.75-6.65 और REC का 4.66-5.49 था। PFC का मार्केट कैप करीब ₹125,000 करोड़ और REC का ₹80,000 करोड़ है, IREDA के ₹30,615 करोड़ के मुकाबले। यह वैल्यूएशन गैप दिखाता है कि निवेशक PFC और REC की स्थापित स्थिति और कम फंडिंग लागत को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
धीमी मंजूरी और जरूरी डेटा का अभाव
IREDA की लोन बुक में बड़ा इजाफा हुआ है, लेकिन FY25-26 के लिए सैंक्शन में 9% की वृद्धि, बुक के 22% विस्तार की तुलना में धीमी लगती है। यह नए प्रोजेक्ट्स में सुस्ती या लोन मंजूरी से डिस्बर्समेंट तक की लंबी प्रक्रिया का संकेत हो सकता है, जो भविष्य के विकास को प्रभावित कर सकता है। इस अपडेट में एसेट क्वालिटी जैसे अहम आंकड़ों का भी अभाव था, जो किसी भी लेंडर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
बाजार में जोखिम से बचने वाले निवेशक इस जानकारी की कमी से चिंतित हैं। विश्लेषकों (Analysts) का नजरिया आम तौर पर सतर्क रूप से आशावादी है, जिनमें ज्यादातर 'Buy' या 'Neutral' रेटिंग और वर्तमान स्तरों से संभावित अपसाइड दिखाने वाले प्राइस टारगेट (price targets) हैं। लेकिन, शेयर के इस साल 22% के भारी गिरावट और ऐतिहासिक निचले स्तरों के करीब कारोबार करने से पता चलता है कि निवेशक तेजी से लोन अप्रूवल और मजबूत एसेट क्वालिटी मैनेजमेंट के स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।