PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana के तहत देशभर की **19,000** से ज्यादा हाउसिंग सोसायटियों ने छतों पर सोलर सिस्टम लगाए हैं। सरकार ने बिजली बिल घटाने के लिए अब तक **₹422.30 करोड़** की सब्सिडी जारी की है।
रेसिडेंशियल हाउसिंग सोसायटियों ने सोलर रूफटॉप के क्षेत्र में एक बड़ा माइलस्टोन हासिल कर लिया है। PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana के असर से अब सोसायटियां कॉमन-एरिया के बिजली खर्च को घटाने में कामयाब हो रही हैं। सरकार द्वारा दी गई ₹422.30 करोड़ की सब्सिडी ने इन प्रोजेक्ट्स की लागत को काफी हद तक कम कर दिया है।
गुजरात और महाराष्ट्र का दबदबा
फिलहाल इस मोर्चे पर गुजरात और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं। गुजरात में 9,377 सोसायटियां 106.18 मेगावाट बिजली पैदा कर रही हैं, जबकि महाराष्ट्र की 7,594 सोसायटियां 138.99 मेगावाट सोलर पावर के साथ मजबूती से खड़ी हैं। नासिक, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहर भी अब इस बदलाव को तेजी से अपना रहे हैं।
सोलर इकोसिस्टम पर असर
सोलर पैनल्स, इनवर्टर और माउंटिंग स्ट्रक्चर्स की बढ़ती मांग से डोमेस्टिक सोलर कंपनियों के ऑर्डर बुक्स में अच्छी ग्रोथ दिख रही है। हालांकि, निवेशकों को नेट मीटरिंग पॉलिसी में बदलाव और सब्सिडी मिलने में देरी जैसे रिस्क पर नजर रखनी चाहिए।
ऑपरेश्नल रिस्क और चुनौतियां
निवेशकों के लिए लंबे समय के लिहाज से सोलर पैनल्स का मेंटेनेंस, इंस्टॉलेशन क्वालिटी और DISCOMs की तरफ से आने वाली ग्रिड कनेक्टिविटी की शर्तें अहम हैं। इंडस्ट्री की स्केलेबिलिटी इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले 20 से 25 सालों तक इन सिस्टम्स को कितनी कुशलता से मेंटेन किया जाता है। EPC कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी के लिए मेंटेनेंस और एग्जीक्यूशन की क्वालिटी पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
