हिंदुजा रिन्यूएबल्स की 10 GW क्षमता के लिए $4 बिलियन की योजना

RENEWABLES
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
हिंदुजा रिन्यूएबल्स की 10 GW क्षमता के लिए $4 बिलियन की योजना
Overview

हिंदुजा रिन्यूएबल्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 3 GW से बढ़ाकर 10 GW करने के लिए $4 बिलियन का निवेश करने जा रही है। हिंदुजा ग्रुप की क्लीन एनर्जी शाखा सौर ऊर्जा से हटकर पवन ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण (energy storage) और डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि भारत में चौबीसों घंटे हरित ऊर्जा समाधान (round-the-clock green energy solutions) प्रदान किए जा सकें। इस रणनीतिक कदम का लक्ष्य देश के स्वच्छ ऊर्जा बाजार की विकसित होती मांगों को पूरा करना है।

हिंदुजा ग्रुप की हरित ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को गति

Hinduजा रिन्यूएबल्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (HREPL) ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 3 GW से बढ़ाकर 10 GW करने के लिए लगभग $4 बिलियन (₹36,130 करोड़) की महत्वपूर्ण विस्तार योजना की घोषणा की है। यह तीन गुना से अधिक वृद्धि हिंदुजा ग्रुप द्वारा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर एक निर्णायक बदलाव का संकेत देती है।

पवन और भंडारण की ओर रणनीतिक बदलाव

HREPL के एमडी और सीईओ दीपक ठाकुर ने कंपनी के रणनीतिक बदलाव पर प्रकाश डाला। ठाकुर ने कहा, "हम निर्णायक रूप से पवन ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रहे हैं," जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा बाजार के परिवर्तन के अनुरूप है। इस कदम से HREPL अपने बड़े पैमाने पर सौर-आधारित पोर्टफोलियो से विकसित होकर चौबीसों घंटे, प्रेषणीय (dispatchable) हरित बिजली प्रदान करेगी।

कंपनी गुजरात में अपनी पहली सौर-पवन हाइब्रिड परियोजना (solar-wind hybrid project) विकसित कर रही है और सक्रिय रूप से अतिरिक्त पवन स्थलों (wind sites) की पहचान कर रही है। पवन और सौर संपत्तियों को एक साथ जोड़ना (Co-locating) बुनियादी ढांचे के उपयोग को अनुकूलित करने और लागतों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की एक प्रमुख रणनीति है। पवन ऊर्जा पर यह जोर, फर्म और प्रेषणीय नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती बाजार मांग के अनुरूप है।

महत्वाकांक्षी ऊर्जा भंडारण लक्ष्य

ऊर्जा भंडारण (Energy storage) HREPL की विकास रणनीति का एक और मुख्य आधार है। कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज (PHS) दोनों का पीछा कर रही है। HREPL ने असम, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तराखंड सहित कई भारतीय राज्यों में लगभग 11,000 MW की पम्प्ड स्टोरेज क्षमता के लिए प्रारंभिक समझौते हासिल किए हैं।

असम में एक प्रारंभिक 1,000 MW पम्प्ड स्टोरेज परियोजना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पूरी होने के करीब है। इस तरह की परियोजनाओं के लिए अनुमानित निवेश ₹4,000 से ₹5,000 करोड़ प्रति 1,000 MW है। अगले पांच वर्षों में, HREPL पम्प्ड स्टोरेज क्षमता में ₹12,000-15,000 करोड़ का निवेश करने की उम्मीद करती है, जो DPR के परिणामों और टैरिफ व्यवहार्यता (tariff viability) पर निर्भर करेगा। ठाकुर ने समझाया, "पम्प्ड स्टोरेज लंबी अवधि के भंडारण (10+ घंटे) के लिए महत्वपूर्ण है, जो अकेले बैटरी आर्थिक रूप से प्रदान नहीं कर सकतीं," जो उनके नियोजित बैटरी भंडारण विस्तार के साथ तालमेल पर जोर देता है।

डिजिटलीकरण और इन-हाउस क्षमताएं

अपने बुनियादी ढांचे की योजनाओं के पूरक के रूप में, HREPL डिजिटलीकरण में निवेश कर रही है, जिसमें संपत्ति की निगरानी (asset monitoring), भविष्य कहनेवाला विश्लेषण (predictive analytics), और ऊर्जा मॉडलिंग (energy modelling) शामिल हैं। कंपनी गुणवत्ता, समय पर निष्पादन और लागत नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए अपनी इन-हाउस इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC), और संचालन और रखरखाव (O&M) क्षमताओं को भी मजबूत कर रही है। इस एकीकृत दृष्टिकोण का उद्देश्य भंडारण अवधियों के पूरे स्पेक्ट्रम में व्यापक ऊर्जा समाधान प्रदान करना है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.