गुजरात सरकार ने 'PM Surya Ghar' योजना के तहत 3 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने के लिए ₹1,000 करोड़ की सब्सिडी को मंजूरी दी है। राज्य में बिजली की रिकॉर्ड मांग को देखते हुए यह कदम सोलर मैन्युफैक्चरर्स और EPC कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
गुजरात सरकार ने बिजली की भारी मांग से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में बिजली की डिमांड अब तक के उच्चतम स्तर यानी 29,822 मेगावाट तक पहुंच गई है, जिसके चलते सरकारी खजाने से ₹1,000 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी को मंजूरी दी गई है। इस फंड का उद्देश्य राज्य के 3 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम को तेजी से लगवाना है।\n\n### सब्सिडी का गणित और फायदा\nयह पहल केंद्र की 'PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana' को और अधिक मजबूती देगी। योजना के तहत, 2 किलोवाट तक के सिस्टम के लिए सामान्य घरों को बेंचमार्क लागत का केवल 10% भुगतान करना होगा, जबकि SC/ST परिवारों के लिए यह खर्च केवल 5% होगा। एक सामान्य 1 किलोवाट सिस्टम की लागत घटकर क्रमशः ₹5,400 और ₹2,700 रह जाएगी।\n\n### बाजार और निवेशकों के लिए संकेत\nयह सरकारी नीति सोलर इकोसिस्टम से जुड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा डिमांड कैटलिस्ट (Demand Catalyst) है। जो कंपनियां फोटोवोल्टिक मॉड्यूल, इनवर्टर और माउंटिंग स्ट्रक्चर बनाती हैं, उनके ऑर्डर बुक में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) सेक्टर की कंपनियों को भी इंस्टॉलेशन और ग्रिड इंटीग्रेशन से सीधा फायदा होगा।\n\n### चुनौतियां और सतर्कता\nहालांकि, निवेशकों को सिक्के का दूसरा पहलू भी देखना चाहिए। सोलर पैनल दिन में बिजली की मांग कम करने में तो मददगार हैं, लेकिन शाम के समय जब ग्रिड पर लोड बढ़ता है, तब सोलर पावर उपलब्ध नहीं होती। इसलिए, राज्य अभी भी थर्मल पावर पर निर्भर है। इस विकास की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रोजेक्ट्स कितनी तेजी से पूरे होते हैं और क्या ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर इस बढ़े हुए सोलर पावर को झेलने में सक्षम है। आने वाली तिमाहियों में इन कंपनियों की रेवेन्यू विजिबिलिटी पर नजर रखना मुनाफे का सौदा हो सकता है।
