Greenzo Energy ने अपनी इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विस्तार देने के लिए कुल **₹251 करोड़** की फंडिंग जुटाई है। इस निवेश का इस्तेमाल कंपनी अपने इन-हाउस कंपोनेंट बनाने और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए करेगी, ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो सके।
Greenzo Energy ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपना दबदबा बढ़ाते हुए फंडिंग के अपने हालिया राउंड में कुल ₹251 करोड़ का फंड जुटा लिया है। इस बड़ी रकम का ₹130 करोड़ का हिस्सा हाल ही में कंपनी को प्राप्त हुआ है। कंपनी का पूरा ध्यान अब इलेक्ट्रोलाइजर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर है, जो ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण मशीन मानी जाती है।
स्थानीय उत्पादन पर जोर
भारत में अभी भी ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए अधिकांश इक्विपमेंट विदेशी सप्लायर्स से मंगाए जाते हैं। Greenzo Energy की रणनीति 'बैकवर्ड इंटीग्रेशन' के जरिए अपने सप्लाय चेन को सुरक्षित करना है। इन-हाउस कंपोनेंट्स बनाकर कंपनी अपने प्रोडक्शन कॉस्ट को कम करने की कोशिश करेगी। इसके अलावा, इस फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश किया जाएगा ताकि उपकरणों की कार्यक्षमता (Efficiency) को अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर लाया जा सके।
कॉम्पिटिशन और चुनौतियां
'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का ग्लोबल हब बनाने की तैयारी है, जिससे बाजार में एक्टिविटी काफी बढ़ गई है। हालांकि, यह सेक्टर काफी कैपिटल-इंटेन्सिव है और बड़े इंडस्ट्रियल ग्रुप्स भी इसमें उतर रहे हैं। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती फॉसिल-फ्यूल के मुकाबले ग्रीन हाइड्रोजन की कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कंपनी समय पर अपने प्रोजेक्ट्स को कैसे पूरा करती है और क्या उसकी स्वदेशी मशीनें विदेशी मॉडल्स को टक्कर दे पाएंगी।
