कंसोलिडेटेड परफॉर्मेंस में दम
Grasim Industries के तीसरी तिमाही के नतीजे शानदार रहे हैं। कंसोलिडेटेड बेसिस पर, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹2,232.95 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 28.76% ज्यादा है। कंपनी की कमाई, यानी रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) में भी 25.25% का इजाफा देखा गया और यह ₹44,311.97 करोड़ पर जा पहुंचा। कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन भी सुधरकर 13.61% हो गया, जो पिछले साल 12.53% था। कंपनी का कंसोलिडेटेड ईपीएस (EPS) भी 24.33% बढ़कर ₹15.28 हो गया।
स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस पर चिंता
हालांकि, कंसोलिडेटेड तस्वीर के दूसरी ओर, Grasim का स्टैंडअलोन परफॉरमेंस थोड़ा चिंताजनक रहा। इस तिमाही में स्टैंडअलोन नेट लॉस बढ़कर ₹174.44 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹168.65 करोड़ था। यह तब हुआ जब स्टैंडअलोन रेवेन्यू 28.46% बढ़कर ₹10,431.76 करोड़ हुआ।
खास वजहें और स्ट्रैटेजिक मूव्स
कंसोलिडेटेड नतीजों में कुछ खास आइटम (Exceptional items) का भी असर रहा, जिसमें लेबर कोड्स का प्रभाव (₹185.68 करोड़) और एक इन्वेस्टमेंट पर इंपेयरमेंट (₹47.67 करोड़) शामिल है, जिससे कुल ₹199.93 करोड़ का नुकसान हुआ।
कंपनी ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा स्ट्रैटेजिक कदम उठाया है। Global Infrastructure Partners (GIP) ने Grasim की सब्सिडियरी Aditya Birla Renewables Limited (ABRen) में ₹3,000 करोड़ तक का इन्वेस्टमेंट करने की बात कही है, जिससे ABRen में GIP की माइनॉरिटी स्टेक होगी। Essel Mining & Industries Limited (EMIL) ने भी ABRen में ₹500 करोड़ का निवेश किया है।
इसके अलावा, कंपनी अपने कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव कर रही है। Aditya Birla Finance Limited (ABFL) का Aditya Birla Capital Limited (ABCL) में मर्जर किया जा रहा है। साथ ही, Kesoram Industries के सीमेंट बिजनेस को UltraTech Cement Limited (UTCL) में कंसॉलिडेट किया जा रहा है। UTCL ने The India Cements Limited में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 74.99% और RAKWCT में 66.34% कर ली है।
रिस्क और आगे का रास्ता
मुख्य चिंता का विषय स्टैंडअलोन बिजनेस में लगातार हो रहा नुकसान है, जिस पर कंपनी को ध्यान देने की ज़रूरत होगी। इसके साथ ही, कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) बढ़कर 1.26 हो गया है, जो पिछले साल 1.13 था।
आगे चलकर, रिन्यूएबल एनर्जी में बड़े इन्वेस्टमेंट और चल रहे कॉर्पोरेट कंसॉलिडेशन पर नजर रहेगी। इन्वेस्टर्स उम्मीद कर रहे हैं कि इन स्ट्रैटेजिक मूव्स से कंपनी को लंबी अवधि में फायदा होगा।