GREW Solar ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। Bay Capital Investment की अगुवाई में हुए एक फंडिंग राउंड में कंपनी ने ₹1,050 करोड़ की भारी रकम जुटाई है। यह कैपिटल इंजेक्शन, कंपनी की सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को तेजी से बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना का अहम हिस्सा है, और यह GREW Solar की ग्रोथ स्ट्रेटेजी और इंटीग्रेटेड सोलर सॉल्यूशन प्रोवाइडर बनने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
यह ₹1,050 करोड़ का फंड GREW Solar के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इस महत्वपूर्ण फंडिंग में Bay Capital Investment Limited के साथ दो अन्य इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स शामिल हैं। यह कंपनी द्वारा पहले जुटाई गई ₹300 करोड़ की रकम के बाद आया है, जिसमें विजय केडिया और रोहित कोठारी जैसे निवेशक भी शामिल थे। 2022 में स्थापित और चिरिपाल ग्रुप (Chiripal Group) द्वारा समर्थित इस कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2024 में ₹1 करोड़ से भी कम का रेवेन्यू दर्ज किया था।
अब, इस नई पूंजी का इस्तेमाल मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (Narmadapuram) स्थित प्लांट की सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को तेजी से बढ़ाने के लिए किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य 3 GW की वर्तमान क्षमता को 2026 के अंत तक बढ़ाकर 8 GW तक ले जाना है। इसके साथ ही, राजस्थान के डीदू (Dudu) में मौजूद मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को भी 11 GW तक बढ़ाया जाएगा, जिससे यह एक फुल-फ्लेज्ड, एंड-टू-एंड सोलर प्रोड्यूसर बन सके।
GREW Solar अपनी सेल मैन्युफैक्चरिंग के लिए TOPCon (Tunnel Oxide Passivated Contact) टेक्नोलॉजी पर बड़ा दांव खेल रही है। यह टेक्नोलॉजी पारंपरिक PERC सेल्स की तुलना में कहीं ज्यादा एफिशिएंट और ड्यूरेबल मानी जाती है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि TOPCon सेल्स आने वाले समय में भारत के सोलर सेक्टर में सबसे बड़ा मार्केट शेयर हासिल करेंगी। इस एडवांस टेक्नोलॉजी को अपनाकर GREW Solar हाई-परफॉरमेंस वाले सोलर सॉल्यूशंस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक मजबूत स्थिति में होगी।
हालांकि, भारत का सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सरकार की PLI स्कीम जैसे इंसेंटिव्स के चलते जबरदस्त ग्रोथ देख रहा है, लेकिन यह काफी कॉम्पिटिटिव भी है। 8 GW सेल मैन्युफैक्चरिंग का लक्ष्य GREW Solar को Waaree Energies (जिसकी सेल कैपेसिटी लगभग 5.4 GW है), Adani Solar (जो 10 GW का इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बना रही है), और Vikram Solar (जिसकी 5 GW की TOPCon फैसिलिटी हाल ही में शुरू हुई है और कुल मॉड्यूल कैपेसिटी 9.5 GW है) जैसे स्थापित दिग्गजों से सीधे मुकाबले में खड़ा करता है।
इसके अलावा, भारत में मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी डोमेस्टिक डिमांड से कहीं ज्यादा बढ़ गई है, जबकि सेल्स, वेफर्स और पॉलीसिलिकॉन जैसे अपस्ट्रीम सेगमेंट्स में अभी भी एक बड़ा गैप है। यह असंतुलन डोमेस्टिक कंटेंट की जरूरतों को पूरा करने में बाधा डालता है और सप्लाई चेन वल्नरेबिलिटीज़ बढ़ाता है। ₹1 करोड़ से कम रेवेन्यू वाली कंपनी के लिए 8 GW तक विस्तार करना एक बड़ा एग्जीक्यूशन चैलेंज होगा।
पांच दशक पुराने चिरिपाल ग्रुप का समर्थन GREW Solar को एक मजबूत औद्योगिक आधार प्रदान करता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी इस डायनामिक रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी आक्रामक विस्तार योजनाओं को कितनी कुशलता से लागू कर पाती है। सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और महत्वाकांक्षी रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों के बीच GREW Solar के लिए ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन सफलता उसकी कैपिटल एफिशिएंसी, मार्केट पेनेट्रेशन और प्रतिस्पर्धी माहौल में टिके रहने की क्षमता पर निर्भर करेगी।