ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देगा कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) मिशन
यह फंडिंग GPS Renewables के कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्रोजेक्ट्स को नई गति देगी। इस पूंजी निवेश से नए प्रोजेक्ट्स को तेजी से विकसित किया जाएगा। कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ पहले से ही साझेदारी में है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अस्थिर ग्लोबल फ्यूल मार्केट (Global Fuel Market) से जूझ रहा है और अपनी घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है। कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को ऑर्गेनिक कचरे से बनने वाले एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ईंधन के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों ज़रूरी है भारत में घरेलू ईंधन?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा आयात पर भारी निर्भरता के कारण चुनौतीपूर्ण है। देश की लगभग 60% LNG पश्चिम एशिया से आती है, जो भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र है। हाल की घटनाओं ने LPG की आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित किया है। ऐसे में, देश में ही बनने वाली कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) एक मज़बूत विकल्प पेश करती है। भारत सरकार भी सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन (SATAT) और कंप्रेस्ड बायोगैस ब्लेंडिंग ऑब्लिगेशन (CBO) जैसी योजनाओं के जरिए CBG को बढ़ावा दे रही है। CBO के तहत 2025 तक नेचुरल गैस में CBG को ब्लेंड करना अनिवार्य होगा, जिससे इसकी मांग सुनिश्चित है।
GPS Renewables का विजन और प्रोजेक्ट्स
यह फंडिंग Arya प्लेटफॉर्म को अपने CBG प्रोजेक्ट डेवलपमेंट पाइपलाइन को गति देने में मदद करेगी। GPS Renewables के पास टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन (EPC) और ऑपरेशंस में एक दशक का अनुभव है। कंपनी वर्तमान में लगभग $1 अरब के कैपिटल आउटले (Capital Outlay) वाले प्रोजेक्ट्स विकसित कर रही है और इसका लक्ष्य सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) जैसे अन्य वैकल्पिक ईंधनों में भी विस्तार करना है। इसके मौजूदा पोर्टफोलियो में इंदौर का एशिया का सबसे बड़ा म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट-आधारित CBG प्लांट और काकीनाडा में एक बड़ा कॉम्प्लेक्स शामिल है। GPS Renewables के पास ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ साझेदारी में 200 से अधिक CBG प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन है। कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) दोनों के साथ ज्वाइंट वेंचर (Joint Ventures) वाली एकमात्र भारतीय फर्म है।
भारत का बायोगैस मार्केट और कॉम्पिटिशन
भारत का CBG मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2025 में लगभग $319 मिलियन का यह बाज़ार 2032 तक बढ़कर $2.4 अरब से अधिक हो जाएगा, जिसमें सालाना वृद्धि दर (CAGR) लगभग 33.56% रहेगी। CBO जैसे रेगुलेशन और GOBARdhan जैसी सरकारी योजनाओं से यह ग्रोथ संभव हो रही है। इस सेक्टर में निवेश बढ़ रहा है, और 2026-27 के लिए ₹5,000 करोड़ (लगभग $600 मिलियन) से अधिक के निवेश का अनुमान है। GPS Renewables अपनी फुल-सर्विस अप्रोच और प्रमुख OMCs के साथ रणनीतिक ज्वाइंट वेंचर के कारण अलग दिखती है। इसके मुख्य प्रतिस्पर्धियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी बड़ी सरकारी कंपनियां और Praj Industries, Thermax जैसी प्राइवेट फर्म शामिल हैं।
Axis AMC का क्लीनटेक में निवेश
Alternates by Axis AMC से मिली यह मेज़ानाइन फंडिंग GPS Renewables Arya के ग्रोथ स्टेज और निवेशक के लिए एक सोचे-समझे जोखिम मूल्यांकन को दर्शाती है। मेज़ानाइन फाइनेंसिंग (Mezzanine Financing) आमतौर पर कर्ज और इक्विटी के बीच का अंतर पाटती है, जिससे निवेशकों को ज़्यादा रिटर्न मिलता है और कंपनियों को लचीली पूंजी मिलती है। Axis AMC के स्ट्रक्चर्ड क्रेडिट हेड, नचिकेस नाइक ने बताया कि CBG सेक्टर में यह प्राइवेट क्रेडिट स्पेस के पहले ट्रांजैक्शन में से एक है, जो उभरते क्लीनटेक सेक्टर और भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन (Clean Energy Transition) का समर्थन करने वाली बड़ी CBG परियोजनाओं के प्रति Axis AMC के झुकाव को दर्शाता है। GPS Renewables ने पहले भी Caspian, Triodos Investment Management और Neev Fund जैसे निवेशकों से पूंजी जुटाई है। कंपनी का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 100 प्लांट संचालित करना है।
बायोगैस प्रोजेक्ट्स के सामने चुनौतियां
तेज़ ग्रोथ और सरकारी समर्थन के बावजूद, CBG सेक्टर को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लगभग $1 अरब के कैपिटल आउटले वाले प्रोजेक्ट्स विकसित करना और फीडस्टॉक (Feedstock) जुटाना और लॉजिस्टिक्स (Logistics) मैनेज करना महत्वपूर्ण बाधाएं हैं। हालांकि, GOBARdhan जैसी योजनाएं वेस्ट मैनेजमेंट (Waste Management) में मदद करती हैं। CBG आयातित फॉसिल गैस की जगह लेता है, लेकिन इसकी आर्थिक व्यवहार्यता घटते नेचुरल गैस की कीमतों और नीतिगत बदलावों पर निर्भर करती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अदानी टोटल एनर्जीज़ बायोमास लिमिटेड जैसे बड़े खिलाड़ी भी इस सेक्टर में विस्तार कर रहे हैं। कंपनी के सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल में विस्तार की योजनाएं नई तकनीकी और बाज़ार संबंधी जोखिम भी पेश करती हैं।