दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने दिल्ली मास्टर प्लान 2047 का मसौदा जारी किया है। इस प्लान के तहत शहर में नहरों, नालों और सरकारी इमारतों पर सोलर एनर्जी जेनरेट करने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह अभी एक पॉलिसी फ्रेमवर्क है जिसे केंद्रीय मंजूरी का इंतजार है। इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के लिए यह एक अहम खबर हो सकती है।
दिल्ली में रिन्यूएबल एनर्जी का नया प्लान
दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने शहर के भविष्य के लिए एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है, जिसे दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) नाम दिया गया है। इस प्लान का मुख्य फोकस शहर में रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ाना है, खासकर गैर-पारंपरिक तरीकों से। DDA का सुझाव है कि नहरों और नालों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाई जाए, लेकिन इसके लिए साइट की तकनीकी जांच (feasibility studies) जरूरी होगी।
सरकारी इमारतों में भी सोलर पैनल जरूरी
इस प्लान में ऊर्जा की भविष्य की जरूरतों को लेकर कई अहम बातें शामिल हैं। जिन सरकारी इमारतों और संस्थाओं की छतों का एरिया 500 स्क्वायर मीटर से ज्यादा है, वहां दिल्ली सोलर पॉलिसी के नियमों के तहत सोलर पैनल लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, नए ग्रीनफील्ड इलाकों में खेती के साथ-साथ सोलर फार्म (agriculture-cum-solar farms) बनाने को भी बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, बस डिपो और मेट्रो स्टेशनों जैसे बड़े पब्लिक ट्रांसपोर्ट हब को भी रिन्यूएबल पावर सोर्स की ओर शिफ्ट करने की बात कही गई है। पावर ग्रिड को मॉडर्न बनाने के लिए, खासकर नए लैंड पूलिंग एरिया में, अंडरग्राउंड ट्रांसमिशन नेटवर्क की ओर बढ़ने का भी सुझाव दिया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए अवसर
रिन्यूएबल एनर्जी और कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए ये प्रस्ताव भविष्य में कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दरवाजे खोल सकते हैं। जो कंपनियां सोलर इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) सर्विसेज में हैं, और जो बड़े पैमाने पर शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़ी हैं, वे प्लान के फाइनल अप्रूवल के बाद सरकारी टेंडर्स और प्रोजेक्ट नोटिफिकेशन्स पर नजर रख सकती हैं। पब्लिक यूटिलिटीज के लिए रिन्यूएबल एनर्जी को अनिवार्य बनाने से नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में सोलर इक्विपमेंट और मेंटेनेंस सर्विसेज की डिमांड बनी रह सकती है।
क्या हैं चुनौतियाँ?
हालांकि, मास्टर प्लान को ज़मीनी हकीकत में बदलना एक जटिल प्रक्रिया है। यह प्रस्ताव अभी सिर्फ एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट है जिसे हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री से फाइनल क्लीयरेंस मिलना बाकी है। दिल्ली में शहरी नियोजन के पिछले अनुभवों को देखें तो अक्सर पॉलिसी अप्रूवल और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन के बीच एक बड़ा टाइम लैग (time lag) देखने को मिलता है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नहरों और नालों से सोलर पावर जेनरेट करने की क्षमता तकनीकी जांच पर निर्भर करेगी, जिससे इसके वास्तविक इम्प्लीमेंटेशन का स्केल तय होगा। इन एनर्जी इनिशिएटिव्स की सफलता मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन और सरकार की तरफ से जरूरी शुरुआती लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
