Shell India को मिलेगी 30 MW हाइब्रिड पावर
CleanMax Enviro Energy, Shell India को अपनी हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं से बिजली सप्लाई करने के लिए तैयार है। यह डील CleanMax की कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) सेक्टर मेंLeading पोजीशन को और मजबूत करती है, और Shell की स्थिर व टिकाऊ ऊर्जा की जरूरत को पूरा करेगी।
खास हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स
CleanMax कुल मिलाकर लगभग 30 MW क्षमता की दो हाइब्रिड रिन्यूएबल प्लांट तैयार करेगी। गुजरात में 16.83 MW का एक प्लांट, जिसमें 6.93 MW सोलर और 9.90 MW विंड पावर शामिल होगी, Shell के हजीरा LNG टर्मिनल को बिजली देगा। वहीं, कर्नाटक में 13.2 MW का एक प्लांट, जिसमें 9.9 MW सोलर और 3.3 MW विंड पावर होगी, Shell के बेंगलुरु टेक्नोलॉजी सेंटर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा। ये प्रोजेक्ट ग्रुप-कैप्टिव मॉडल पर आधारित हैं, जिससे Shell सीधे ऊर्जा खरीद सकेगा और अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम कर सकेगा।
CleanMax की मार्केट स्ट्रेंथ और फंडिंग
CleanMax भारत की सबसे बड़ी C&I क्लाइंट्स के लिए रिन्यूएबल एनर्जी प्रोवाइडर है, जिसके पास मार्च 2026 तक 5.7 GW की ऑपरेटिंग या कॉन्ट्रैक्टेड क्षमता है। Shell के साथ यह समझौता CleanMax के हाइब्रिड मॉडल की क्षमता को साबित करता है, जो इसे ReNew Power, Azure Power और Fourth Partner Energy जैसे प्रतिद्वंद्वियों से अलग करता है। कंपनी की ग्रोथ को मजबूत निवेशक समर्थन भी मिल रहा है। फरवरी 2026 में, Temasek और Bain Capital से ₹1,500 करोड़ ($200 मिलियन) की प्री-आईपीओ फंडिंग मिली थी। इस राउंड में CleanMax का वैल्यूएशन लगभग ₹51.44 अरब ($615 मिलियन) था, जो स्केलेबल रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस की डिमांड को दिखाता है।
मार्केट की अनुकूल स्थिति
भारत का C&I रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है। इसकी मुख्य वजहें प्रतिस्पर्धी कीमतें, कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी लक्ष्य और सरकारी समर्थन हैं। यह सेक्टर, जो भारत की बिजली खपत का लगभग आधा हिस्सा है, तेजी से रिन्यूएबल्स की ओर बढ़ रहा है। हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स सोलर और विंड को मिलाकर स्थिर बिजली प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो नेशनल विंड-सोलर हाइब्रिड पॉलिसी का भी समर्थन करते हैं। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि C&I मार्केट 2030 तक 80 GW तक पहुंच जाएगा।
चुनौतियां और ग्लोबल परिप्रेक्ष्य
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। ग्लोबल स्तर पर, Shell अपनी लो-कार्बन रणनीति में बदलाव के तहत कुछ रिन्यूएबल एसेट्स की समीक्षा कर रही है। भारत में, मार्केट की ग्रोथ के बावजूद, अलग-अलग राज्यों में ओपन एक्सेस रेगुलेशन की अस्थिरता और अप्रूवल में देरी प्रोजेक्ट की सफलता को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, कंपीटिशन भी बढ़ रहा है। Shell की ग्लोबल स्ट्रेटेजी में बदलाव एक महत्वपूर्ण पहलू है जिस पर नजर रखी जाएगी, भले ही वे भारत में अपने प्रोजेक्ट्स पर आगे बढ़ रहे हों।
CleanMax का भविष्य
CleanMax, C&I रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। हालिया फंडिंग और Shell के साथ यह साझेदारी इसके मजबूत ग्रोथ पोटेंशियल को दर्शाती है। कंपनी आईपीओ की योजना बना रही है ताकि आगे विस्तार के लिए पूंजी जुटाई जा सके। C&I क्लाइंट्स की मजबूत मांग और सहायक सरकारी नीतियों से भारत में हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है, और CleanMax इसमें एक प्रमुख खिलाड़ी बना रहेगा।
