डिस्काउंट पर लिस्टिंग, सेक्टर की उम्मीदों से विपरीत
Renewable energy सेक्टर में जहां बाकी कंपनियों के IPOs को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही थी, वहीं Clean Max Enviro Energy Solutions का शेयर बाजार में आगाज फीका रहा। 2 मार्च 2026 को NSE पर कंपनी के शेयर ₹1,053 के इश्यू प्राइस के मुकाबले 9% गिरकर ₹960 पर खुले। BSE पर भी यही हाल रहा, जहां शेयर 9.6% की गिरावट के साथ ₹952 पर लिस्ट हुए। यह निराशाजनक लिस्टिंग इस बात का संकेत है कि 2026 की शुरुआत में कई नए IPOs अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं, करीब 58% IPOs अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। Clean Max के मामले में, डेट (debt) चुकाने पर कंपनी का फोकस निवेशकों, खासकर रिटेल निवेशकों को रास नहीं आया।
निवेशकों की खामोशी और कर्ज का बोझ
IPO को कुल मिलाकर 94% सब्सक्रिप्शन ही मिल पाया। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 2.83 गुना बोली लगाई, लेकिन नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) का हिस्सा सिर्फ 54% ही सब्सक्राइब हुआ। सबसे चिंताजनक बात यह है कि रिटेल निवेशकों ने सिर्फ 6% सब्सक्रिप्शन दिया, जो उनकी कम दिलचस्पी को दर्शाता है। इस IPO से जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा, यानी करीब ₹1,122.67 करोड़, कंपनी अपने बकाया लोन चुकाने में इस्तेमाल करेगी। सितंबर 2025 तक कंपनी पर ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज था। यह साफ है कि कंपनी की पहली प्राथमिकता कर्ज का बोझ कम करना है, न कि आक्रामक ग्रोथ दिखाना, और यह रणनीति छोटे निवेशकों को आकर्षित करने में नाकाम रही।
वैल्यूएशन पर सवाल और सेक्टर की चुनौतियां
Clean Max Enviro की वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। IPO के समय कंपनी का P/E रेश्यो 324.28x से लेकर 634.34x (FY25 आय के आधार पर 600x से भी ऊपर) तक था, जो सेक्टर की दूसरी बड़ी कंपनियों के मुकाबले काफी ज्यादा था। उदाहरण के तौर पर, Adani Green Energy का P/E करीब 94.25x से 106x था, Tata Power का 31.8x, और IREDA का 18.25x था। इसके अलावा, फरवरी 2026 में अमेरिकी सरकार द्वारा भारतीय सोलर इम्पोर्ट पर लगाए गए टैरिफ जैसे बाहरी दबावों ने भी सेक्टर की कंपनियों पर बिकवाली का माहौल बनाया, जिससे नए लिस्टिंग करने वालों के लिए मुश्किलें और बढ़ गईं।
कर्ज की मार और शुरुआती मुनाफे का डर
कंपनी पर ₹7,645 करोड़ का भारी नेट डेट (net debt) था, जबकि कुल उधार ₹10,000 करोड़ से ज्यादा था। इससे नेट डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 2.39x और डेट-टू-EBITDA रेश्यो 4.8x था। फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) कंपनी की कुल आय का लगभग 43% थी, जो मुनाफे पर बड़ा बोझ है। हालांकि, कंपनी FY25 में ₹19.43 करोड़ के नेट प्रॉफिट के साथ मुनाफे में आई, लेकिन पिछले साल की तुलना में इसका प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 130% घट गया। यह दिखाता है कि कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी अभी शुरुआती दौर में है और IPO के पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करना निवेशकों के लिए आकर्षक नहीं है, खासकर IREDA या Waaree Energies जैसी कंपनियों के मुकाबले, जिन्होंने मजबूत फंडामेंटल और IPO में शानदार प्रदर्शन दिखाया है।