Borosil Renewables अब सीधे ग्राहकों के लिए रूफटॉप सोलर मार्केट में कदम रख रही है। कंपनी का लक्ष्य इस सेगमेंट से **₹100 करोड़** का रेवेन्यू हासिल करना है, साथ ही अपनी सोलर ग्लास क्षमता को **1,000** से बढ़ाकर **1,600** टन प्रतिदिन करने की योजना है।
सोलर बिजनेस में नया मोड़
Borosil Renewables अपने पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस से हटकर अब कंज्यूमर-फेसिंग रूफटॉप सोलर मार्केट में उतर रही है। कंपनी ने अपने पहले साल के लिए ₹100 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट सेट किया है। यह कदम कंपनी को एक शुद्ध मैन्युफैक्चरर से एंड-टू-एंड सोलर सॉल्यूशंस प्रोवाइडर के रूप में स्थापित करने की कोशिश है।
इस सेगमेंट में कंपनी सोलर पैनल, इनवर्टर और लिथियम-आयन बैटरी की इंस्टालेशन और आफ्टर-सेल्स सर्विस देगी। इसका सीधा लाभ कंपनी 'PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana' जैसी सरकारी योजनाओं के जरिए लेने की तैयारी में है। हालांकि, निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि कंपनी का मौजूदा मॉडल B2B मैन्युफैक्चरिंग है, जबकि नया प्रोजेक्ट सर्विस और इंस्टालेशन नेटवर्क पर टिका है।
प्रोडक्शन कैपेसिटी में भारी इजाफा
कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी तेजी से बढ़ा रही है। 300-300 टन प्रतिदिन के दो नए फर्नेस लगाकर कुल उत्पादन 1,000 से बढ़ाकर 1,600 टन प्रतिदिन किया जा रहा है। इन नई फैसिलिटीज को दिसंबर से मार्च के बीच शुरू किए जाने की उम्मीद है। इसका पूरा फाइनेंशियल असर फाइनेंशियल ईयर 2027-28 में दिखाई देगा।
मार्केट का कॉम्पिटिशन और जोखिम
भारत में सोलर ग्लास सेक्टर में कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है। वर्तमान में देश में कुल घरेलू उत्पादन 1,700 टन प्रतिदिन है, जबकि आयात (Imports) 8,500 टन प्रतिदिन के आसपास है। कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाकर इस आयात मार्केट का बड़ा हिस्सा हासिल करना चाहती है। हालांकि, रॉ मटेरियल की बढ़ती लागत और ग्लोबल प्राइसिंग का दबाव कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकता है। निवेशकों की नजर अब नई फर्नेस की कमीशनिंग और रूफटॉप प्रोजेक्ट की शुरुआती सफलता पर होनी चाहिए।
