कंपनी के नतीजे: बिक्री और मुनाफे में रिकॉर्ड उछाल
Borosil Renewables ने दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही (Q3 FY26) में कमाल का प्रदर्शन किया है। कंपनी की स्टैंडअलोन बिक्री 40% की शानदार ईयर-ऑन-ईयर (YoY) ग्रोथ के साथ रिकॉर्ड ₹386.5 करोड़ दर्ज की गई। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹275.28 करोड़ से काफी ज्यादा है। वहीं, पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले भी बिक्री में 2.1% का इजाफा हुआ है, जो ₹378.44 करोड़ थी।
इस जोरदार रेवेन्यू ग्रोथ का एक बड़ा कारण कंपनी के सेलिंग प्राइस (Selling Price) में आया उछाल है। प्रति एमएम (per mm) एक्स-फैक्ट्री सेलिंग प्राइस बढ़कर ₹149.97 हो गया, जो पिछले साल ₹104.54 था।
EBITDA में 518% की छलांग
बिक्री में इस उछाल और बेहतर रियलाइजेशन (Realisation) के दम पर कंपनी के EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) में रिकॉर्ड 518% की ज़बरदस्त तेजी देखी गई। यह ₹20.89 करोड़ (जो बिक्री का 7.6% था) से बढ़कर ₹129.04 करोड़ (बिक्री का 33.4%) पर पहुंच गया। पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले EBITDA लगभग स्थिर रहा, जो ₹125.5 करोड़ (बिक्री का 33.2%) था।
9 महीने का प्रदर्शन और कंसोलिडेटेड नतीजे
फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले 9 महीनों (9MFY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। स्टैंडअलोन बिक्री 40% बढ़कर ₹1,097 करोड़ पर पहुंच गई, जबकि EBITDA में 235% का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। कंसोलिडेटेड आधार पर भी Q3 FY26 में रेवेन्यू ₹390.46 करोड़ और EBITDA ₹130.94 करोड़ रहा।
फायदे का सौदा: प्राइस रियलाइजेशन और एफिशिएंसी
कंपनी के मुनाफे में यह भारी उछाल बेहतर सेलिंग प्राइस और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) के कारण आया है, जिसने कंपनी के मार्जिन को काफी बढ़ाया है। 9MFY26 में वॉल्यूम ग्रोथ लगभग 6% रही, जो साफ दिखाता है कि प्राइस रियलाइजेशन ही ग्रोथ का मुख्य जरिया था।
फंड जुटाने का प्लान
कंपनी के मैनेजमेंट ने यह भी साफ किया है कि मौजूदा विस्तार योजनाओं के लिए किसी भी तरह की इक्विटी (Equity) डाइल्यूशन नहीं होगी। विस्तार के लिए फंड जुटा लिया गया है और भविष्य की योजनाओं के लिए कैश एक्रुअल (Cash Accrual) से फंडिंग की जाएगी।
एक्सपोर्ट मार्केट में चुनौती
हालांकि, कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि यूरोपीय यूनियन (EU), तुर्की और अमेरिका जैसे एक्सपोर्ट मार्केट में मांग में कमी के चलते थोड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
विदेशी सब्सिडियरी की समस्या और गैस की कीमतें
जर्मनी स्थित सब्सिडियरी, Geosphere के दिवालियापन (insolvency) को लेकर कंपनी ने कहा है कि उसे कंसोलिडेटेड नतीजों से अलग कर दिया गया है और इसका आगे कोई खास असर नहीं पड़ेगा। वहीं, नेचुरल गैस की बढ़ती कीमतों का असर भी कंपनी पर मामूली रहने की उम्मीद है, क्योंकि ऑपरेशनल एफिशिएंसी से इसे मैनेज किया जा रहा है।
भविष्य की योजनाएं: क्षमता विस्तार और सरकारी नीतियां
Borosil Renewables अपनी सोलर ग्लास क्षमता को 600 TPD (टन प्रति दिन) तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इस नई क्षमता का फेज्ड स्टार्ट दिसंबर 2026 से होगा और यह मार्च 2027 तक पूरी तरह से चालू हो जाएगी। यह कदम घरेलू उत्पादन को काफी बढ़ाएगा।
भारत सरकार की सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने वाली नीतियां, जैसे ALMM-II और ALMM-III, और संभावित इंडो-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), घरेलू मांग को और तेज करेंगी और स्थानीय निर्माताओं को फायदा पहुंचाएंगी।
आयात पर निर्भरता कम करने का मौका
भारत में 2027 तक 200 GW मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का लक्ष्य और लगातार बढ़ रही क्षमता (मार्च 2027 तक 51 GW) सोलर ग्लास की मजबूत मांग की ओर इशारा करती है। वर्तमान में, सोलर ग्लास के आयात पर काफी निर्भरता है, जो Borosil Renewables जैसी कंपनियों के लिए इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन (Import Substitution) के बड़े अवसर पैदा करता है।
रिटर्न और सुरक्षा
कंपनी का लक्ष्य विस्तार के बाद रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) को 25% से ऊपर ले जाना है। इसके अलावा, मलेशिया से होने वाले आयात पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) का जून 2026 तक बढ़ाया जाना, कंपनी को आयातित सामान के खिलाफ एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।