BII का बड़ा माइलस्टोन: भारत की ग्रीन इकॉनमी में बड़ा भरोसा
ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII), जो यूके का डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (DFI) है, ने भारत में अपने जलवायु वित्त (Climate Finance) के लक्ष्य को न केवल पूरा किया, बल्कि उसे पार भी कर लिया है। BII की 2022-2026 की रणनीति के तहत, भारत अब इसका सबसे बड़ा सिंगल-कंट्री एक्सपोजर बन गया है, जहां निवेश $1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। BII के इंडिया हेड, शिल्पा कुमार, इस पोर्टफोलियो को संभाल रही हैं, जिसका विस्तार 600 से ज़्यादा कंपनियों में हो चुका है। पहले IT सेक्टर में निवेश करने वाली BII अब स्थायी पहलों (sustainable initiatives) की ओर रणनीतिक रूप से बढ़ रही है। एशिया और अफ्रीका में BII के सालाना निवेश का 40% से ज़्यादा हिस्सा अब जलवायु-संबंधित प्रोजेक्ट्स पर जा रहा है। 2023 में रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) में किए गए निवेश से 15 लाख टन CO₂ उत्सर्जन को कम करने में मदद मिली है।
EV क्रांति को बढ़ावा: Turno और ई-बस सेगमेंट में निवेश
BII ने भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Turno में ₹430 मिलियन (लगभग $4.74 मिलियन डॉलर) का नया निवेश किया है। इस फंड का इस्तेमाल Turno के नए ई-बस डिवीजन, ElectricGo को लॉन्च करने के लिए किया जाएगा। यह पहल 34 इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसों के फाइनेंसिंग (financing) को आसान बनाएगी। Turno, जो EV फाइनेंसिंग के लिए लाइफसाइकिल इंटेलिजेंस और सेकंड-लाइफ बैटरी डिप्लॉयमेंट का उपयोग करती है, को इससे पहले मई 2024 में भी BII से फंड मिला था। भले ही Turno ने फाइनेंशियल ईयर 24 (FY24) में ₹3.67 करोड़ का रेवेन्यू और ₹31.87 करोड़ का लॉस दर्ज किया हो, लेकिन EV फाइनेंसिंग और बैटरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर इसका फोकस भारत के तेजी से बढ़ते ई-मोबिलिटी सेक्टर के साथ मेल खाता है। जनवरी 2026 तक, भारत का EV मार्केट सालाना 30% से ज़्यादा की दर से बढ़ रहा है, और 2024 में एनर्जी ट्रांजिशन (energy transition) निवेश का 49% ई-मोबिलिटी में गया है।
भारत के बड़े ग्रीन लक्ष्य और निवेश की ज़रूरत
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो (net-zero) उत्सर्जन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, साथ ही 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता विकसित करने का भी टारगेट है। भारत पहले ही नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता के 50% लक्ष्य को समय से पहले हासिल कर चुका है। भारत क्लीन एनर्जी जनरेशन के लिए डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (DFI) से फंड प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश है, जिसने 2024 में करीब $2.4 अरब डॉलर जुटाए हैं। हालांकि, 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों के लिए कुल निवेश की ज़रूरत बहुत बड़ी है, जिसका अनुमान $10.1 ट्रिलियन डॉलर (2070 तक) और $2.5 ट्रिलियन डॉलर (2030 तक) है। इस प्रवाह को सुविधाजनक बनाने के लिए, भारत एक क्लाइमेट फाइनेंस टैक्सोनॉमी (Climate Finance Taxonomy) विकसित कर रहा है, जिसका ड्राफ्ट मई 2025 में जारी किया गया था।
चुनौतियां भी कम नहीं: एग्जीक्यूशन और सिस्टमेटिक रिस्क
BII की सफलता के बावजूद, भारत को अपनी ग्रीन ट्रांजिशन (green transition) में महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन (execution) चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी (renewable capacity) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, देश को अगले पांच वर्षों में अपनी सालाना कैपेसिटी एडिशन (capacity addition) को लगभग दोगुना करके 50 GW करना होगा। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनियों को हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर (high capital expenditure) और लेवरेज रिस्क (leverage risks) से निपटना पड़ता है। Turno द्वारा FY24 में दर्ज किए गए वित्तीय नुकसान कंपनी-स्तरीय जोखिमों को दर्शाते हैं। इसके अलावा, भारत का नेट-जीरो लक्ष्य भले ही घोषित हो, लेकिन कुछ विश्लेषणों में इसकी पारदर्शिता और लक्ष्य संरचना को 'खराब' रेट किया गया है, और कोयला अभी भी ऊर्जा आपूर्ति में अहम भूमिका निभा रहा है। एडवांस इकोनॉमीज की तुलना में भारत में ग्रिड-स्केल रिन्यूएबल एनर्जी के लिए कैपिटल की लागत 80% ज़्यादा है। स्मॉल-स्केल रिन्यूएबल्स और एनर्जी एफिशिएंसी (energy efficiency) सेक्टर्स के लिए पॉलिसी सपोर्ट में भी दिक्कतें बनी हुई हैं।
आगे की राह: पॉलिसी और निवेशक मिलकर करेंगे काम
BII द्वारा जलवायु वित्त में बड़ा निवेश, भारत की बढ़ती ग्रीन इकॉनमी में इंस्टीट्यूशनल कैपिटल (institutional capital) को आकर्षित करने के सकारात्मक रुझान को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत तेजी से डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) और आर्थिक विकास को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है, सहयोगात्मक पॉलिसी एक्शन (policy actions) और निवेशकों द्वारा अनुकूलित फंडिंग एप्रोच (funding approaches) महत्वपूर्ण होंगे। DFI कैपिटल, प्राइवेट सेक्टर इनोवेशन और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (regulatory frameworks) का तालमेल, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (electric mobility) और रिन्यूएबल एनर्जी जनरेशन जैसे डायनामिक सेक्टर्स में, महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने की गति और प्रभावशीलता निर्धारित करेगा। निवेशों को डी-रिस्क (de-risking) करने और इनोवेटिव फाइनेंसियल प्रोडक्ट (financial products) विकसित करने पर लगातार ध्यान देना, भारत के लो-कार्बन ट्रांजिशन के लिए और अधिक कैपिटल अनलॉक करने की कुंजी होगी।